PM Internship Scheme: 10वीं पास से लेकर ग्रेजुएट तक – टॉप 500 कंपनियों में एंट्री, वजीफा और करियर सेट करने का पूरा ‘ब्लूप्रिंट’

पीएम इंटर्नशिप स्कीम क्या है?

यह भारत सरकार द्वारा शुरू की गई एक महत्वपूर्ण पहल है। वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने केंद्रीय बजट 2024-25 में इसकी घोषणा की। इसका मुख्य उद्देश्य भारत के युवाओं को रोजगार के लिए तैयार करना है। सरकार ने अगले पांच वर्षों में एक करोड़ युवाओं को इंटर्नशिप देने का लक्ष्य रखा है। आप इस योजना के माध्यम से देश की शीर्ष 500 कंपनियों में काम सीख सकते हैं। यह इंटर्नशिप 12 महीने की अवधि के लिए होगी। आपको इस दौरान वास्तविक कारोबारी माहौल में काम करने का मौका मिलेगा।

सरकार आपको इस अवधि के दौरान वित्तीय सहायता भी प्रदान करेगी। आपको हर महीने 5000 रुपये का वजीफा मिलेगा। इसमें से 4500 रुपये सरकार देगी और 500 रुपये कंपनी अपने सीएसआर फंड से देगी। आपको इसके अलावा 6000 रुपये की एकमुश्त राशि भी मिलेगी। यह राशि आपको इंटर्नशिप शुरू करने पर मिलती है। यह योजना केवल किताबी ज्ञान तक सीमित नहीं है। यह आपको व्यावहारिक कौशल सिखाती है। आप कक्षा से निकलकर कॉर्पोरेट दुनिया का अनुभव करते हैं। यह योजना उन युवाओं के लिए एक पुल का काम करती है जो डिग्री के बाद नौकरी तलाश रहे हैं।

भारत में इंटर्नशिप की जरूरत क्यों पड़ी

भारत में हर साल लाखों छात्र अपनी डिग्री पूरी करते हैं। डिग्री हाथ में होने के बावजूद उन्हें नौकरी नहीं मिलती। नियोक्ताओं को ऐसे लोगों की तलाश होती है जिनके पास अनुभव हो। फ्रेशर्स के पास अक्सर यह अनुभव नहीं होता। इंटर्नशिप इस समस्या का सीधा समाधान है। यह आपको नौकरी लगने से पहले काम करने का तरीका सिखाती है। आप इंटर्नशिप के दौरान उद्योग की मांग को समझते हैं।

कंपनियां किसी को नौकरी पर रखने से पहले आश्वस्त होना चाहती हैं। इंटर्नशिप कंपनियों को आपकी क्षमता परखने का मौका देती है। आप भी यह समझ पाते हैं कि आप किस काम के लिए बने हैं। भारत जैसे विशाल देश में कौशल विकास की बहुत आवश्यकता है। केवल डिग्री अब सफलता की गारंटी नहीं है। आपको तकनीकी और व्यावहारिक ज्ञान की जरूरत है। इंटर्नशिप आपको भीड़ से अलग बनाती है। यह आपके बायोडाटा में वजन बढ़ाती है।

पढ़ाई और नौकरी के बीच बढ़ता गैप

हमारी शिक्षा व्यवस्था और उद्योग की जरूरतों में भारी अंतर है। कॉलेज और यूनिवर्सिटी में आप सिद्धांत पढ़ते हैं। आप परीक्षाओं के लिए उत्तर रटते हैं। आप अच्छे नंबर लाते हैं। लेकिन ऑफिस में काम करने का तरीका अलग होता है। वहां आपको समस्याओं को सुलझाना होता है। वहां आपको टीम के साथ काम करना होता है। कॉलेज आपको ये चीजें नहीं सिखाते।

कंपनियां आधुनिक तकनीक का इस्तेमाल करती हैं। कई बार कॉलेज का सिलेबस पुराना होता है। आप जब इंटरव्यू देने जाते हैं तो आप तैयार नहीं होते। नियोक्ता को लगता है कि आपको फिर से सिखाना पड़ेगा। इसमें कंपनी का समय और पैसा खर्च होता है। इसी कारण वे अनुभवी लोगों को प्राथमिकता देते हैं। यह गैप बेरोजगारी का एक बड़ा कारण है। इंटर्नशिप इस खाली जगह को भरती है। यह आपको छात्र से पेशेवर बनाती है। आप पढ़ाई के साथ-साथ काम की दुनिया को समझते हैं।

सरकार को यह योजना लाने की जरूरत क्यों महसूस हुई

भारत एक युवा देश है। हमारी आबादी का एक बड़ा हिस्सा युवाओं का है। इसे डेमोग्राफिक डिविडेंड कहा जाता है। अगर इन युवाओं को काम नहीं मिला तो यह एक समस्या बन सकती है। बेरोजगारी दर बढ़ रही थी। निजी क्षेत्र में कुशल कामगारों की कमी थी। सरकार ने इन दोनों समस्याओं को एक साथ देखा। सरकार समझ गई कि केवल सरकारी नौकरियां सबको रोजगार नहीं दे सकतीं।

निजी क्षेत्र में रोजगार की अपार संभावनाएं हैं। युवाओं को वहां तक पहुंचाने के लिए मदद की जरूरत थी। छोटे और मझोले उद्योग भी कुशल लोग चाहते हैं। सरकार ने इसलिए टॉप 500 कंपनियों को चुना। बड़ी कंपनियों के पास सिखाने के लिए संसाधन होते हैं। सरकार चाहती है कि युवा हुनरमंद बनें। हुनरमंद युवा ही देश की अर्थव्यवस्था को आगे ले जाएंगे। यह योजना युवाओं को आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में एक कदम है। सरकार ने इसे बजट का मुख्य हिस्सा बनाकर अपनी प्राथमिकता स्पष्ट कर दी है।

प्रधानमंत्री इंटर्नशिप योजना की घोषणा कब और कैसे हुई?

यह योजना अचानक सामने नहीं आई। इसकी नींव केंद्रीय बजट 2024-25 में रखी गई थी। वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने 23 जुलाई 2024 को संसद में बजट पेश किया। उन्होंने रोजगार और कौशल विकास को बजट का केंद्र बिंदु बनाया। आप इस बजट को युवाओं के लिए एक बड़े अवसर के रूप में देख सकते हैं। सरकार ने रोजगार से जुड़ी पांच बड़ी योजनाओं की घोषणा की। प्रधानमंत्री इंटर्नशिप योजना इनमें से सबसे प्रमुख थी। सरकार ने युवाओं के लिए 2 लाख करोड़ रुपये के पैकेज का प्रस्ताव रखा। यह घोषणा देश में रोजगार की बदलती तस्वीर को दिखाती है।

बजट भाषण 2024–25 का संदर्भ

बजट भाषण के दौरान पूरा देश रोजगार के आंकड़ों का इंतजार कर रहा था। वित्त मंत्री ने स्पष्ट शब्दों में इस योजना का खाका खींचा। उन्होंने इसे ‘पैकेज फॉर एम्प्लॉयमेंट एंड स्किलिंग’ का हिस्सा बताया। सरकार ने स्वीकार किया कि केवल पारंपरिक शिक्षा काफी नहीं है। बजट में कौशल विकास पर भारी निवेश का वादा किया गया। आप देखेंगे कि यह योजना केवल एक साल के लिए नहीं है। यह अगले पांच वर्षों के लिए एक दीर्घकालिक रणनीति है। सरकार ने निजी क्षेत्र को सीधे तौर पर शामिल किया। यह पहली बार है जब बजट में निजी कंपनियों में इंटर्नशिप को इतने बड़े स्तर पर जगह मिली।

निर्मला सीतारमण की घोषणा का पूरा संदर्भ

वित्त मंत्री ने अपने भाषण में स्पष्ट लक्ष्य निर्धारित किए। उन्होंने घोषणा की कि सरकार 5 साल में 1 करोड़ युवाओं को इंटर्नशिप कराएगी। उन्होंने देश की शीर्ष 500 कंपनियों को इस अभियान से जोड़ा। उन्होंने बताया कि इंटर्नशिप 12 महीने की होगी। आपको हर महीने 5000 रुपये का वजीफा मिलेगा। कंपनियों को सीएसआर फंड का उपयोग करने की अनुमति दी गई। उन्होंने प्रशिक्षण की लागत को भी कंपनियों द्वारा वहन करने की बात कही। यह घोषणा केवल वित्तीय सहायता तक सीमित नहीं थी। वित्त मंत्री ने इसे युवाओं के लिए एक “लॉन्चपैड” बताया। उन्होंने साफ किया कि सरकार चाहती है कि आप उद्योग के माहौल को समझें।

युवाओं के लिए सरकार की सोच

सरकार की सोच अब बदल चुकी है। वे डिग्री बांटने से ज्यादा हुनर विकसित करने पर जोर दे रहे हैं। सरकार चाहती है कि आप नौकरी मांगने वाले नहीं बल्कि काम जानने वाले बनें। वे जानते हैं कि सरकारी नौकरियां सीमित हैं। निजी क्षेत्र में विकास की गति तेज है। सरकार आपको उस गति का हिस्सा बनाना चाहती है। वे आपको सीधे उद्योग के दिग्गजों से सीखने का मौका दे रहे हैं। यह पहल आपको भविष्य की चुनौतियों के लिए तैयार करती है। सरकार चाहती है कि भारत दुनिया की “स्किल कैपिटल” बने। आप इस योजना के केंद्र में हैं। आपकी सफलता ही इस योजना की सफलता है।

पीएम इंटर्नशिप स्कीम का मुख्य उद्देश्य क्या है?

इस योजना का प्राथमिक उद्देश्य आपको एक कुशल पेशेवर में बदलना है। सरकार केवल बेरोजगारी के आंकड़ों को कम नहीं करना चाहती। वे आपको वास्तविक दुनिया की चुनौतियों के लिए तैयार करना चाहते हैं। इसका लक्ष्य भारत के युवाओं को आत्मनिर्भर बनाना है। आप इस योजना के माध्यम से केवल काम नहीं सीखते। आप यह समझते हैं कि एक संगठन कैसे काम करता है। यह योजना आपको एक छात्र से एक जिम्मेदार कर्मचारी में बदल देती है। सरकार चाहती है कि आप नौकरी मांगने के बजाय अपनी शर्तों पर करियर बनाएं।

रोजगार योग्य (Employable) बनाना

डिग्री होना और नौकरी के लायक होना दो अलग बातें हैं। आपके पास अच्छे नंबर हो सकते हैं। लेकिन इसका मतलब यह नहीं है कि आप तुरंत काम शुरू कर सकते हैं। कंपनियां ऐसे लोगों को चाहती हैं जो पहले दिन से काम संभाल सकें। यह योजना आपको रोजगार योग्य बनाती है। आप उन गुणों को विकसित करते हैं जो एक नियोक्ता तलाशता है। आप समय प्रबंधन सीखते हैं। आप संवाद करने का सही तरीका जानते हैं। यह योजना आपको एक “फ्रेशर” के टैग से मुक्त करती है। आप इंटर्नशिप खत्म होने तक एक प्रशिक्षित पेशेवर बन जाते हैं।

स्किल + एक्सपीरियंस का कॉम्बिनेशन

सैद्धांतिक ज्ञान अधूरा होता है। उसे अनुभव की आवश्यकता होती है। यह योजना आपको इन दोनों का एक मजबूत मिश्रण देती है। आप कक्षा में सीखी गई बातों को लागू करते हैं। आप गलतियां करते हैं और उनसे सीखते हैं। यह अनुभव किसी भी किताब से बड़ा शिक्षक है। आपके पास इंटर्नशिप के बाद 12 महीने का अनुभव प्रमाण पत्र होगा। यह अनुभव आपके बायोडाटा को मजबूत बनाता है। आप इंटरव्यू में आत्मविश्वास के साथ बात कर सकते हैं। आपके पास दिखाने के लिए वास्तविक काम होगा। यह कॉम्बिनेशन आपको भीड़ से अलग करता है।

शिक्षा और इंडस्ट्री के बीच की दूरी कम करना

हमारी शिक्षा प्रणाली और उद्योगों की मांग में बड़ा अंतर है। कॉलेज अक्सर पुराने पाठ्यक्रम पढ़ाते हैं। इंडस्ट्री हर दिन बदल रही है। यह योजना इस दूरी को मिटाती है। आप सीधे कार्यस्थल पर मौजूद होते हैं। आप नवीनतम तकनीक और सॉफ्टवेयर का उपयोग करते हैं। आप बाजार के मौजूदा रुझानों को समझते हैं। यह एक्सपोजर आपको कॉलेज की चारदीवारी से बाहर निकालता है। आप समझते हैं कि उद्योग को वास्तव में किस चीज की जरूरत है। यह योजना अकादमिक दुनिया और कॉर्पोरेट दुनिया के बीच एक पुल है।

प्रधानमंत्री इंटर्नशिप योजना किस मंत्रालय के तहत आती है?

यह योजना कॉरपोरेट कार्य मंत्रालय (Ministry of Corporate Affairs – MCA) के अंतर्गत आती है। आमतौर पर रोजगार की योजनाएं श्रम या कौशल विकास मंत्रालय के पास होती हैं। लेकिन इस योजना का ढांचा अलग है। चूंकि इसमें देश की शीर्ष कंपनियां शामिल हैं, इसलिए एमसीए (MCA) को इसकी कमान सौंपी गई है। यह मंत्रालय कंपनियों के कामकाज और नियमों की देखरेख करता है। सरकार ने एमसीए को नोडल मंत्रालय बनाया है। आप आवेदन से लेकर चयन तक की सारी प्रक्रिया इसी मंत्रालय के पोर्टल पर करेंगे। यह मंत्रालय सुनिश्चित करता है कि योजना पारदर्शी और सुचारू रूप से चले।

कॉरपोरेट कार्य मंत्रालय की भूमिका

एमसीए इस योजना का मुख्य संचालक है। उन्होंने ‘pminternship.mca.gov.in’ नाम से एक सेंट्रलाइज्ड पोर्टल बनाया है। मंत्रालय ने पिछले तीन वर्षों के सीएसआर खर्च के आधार पर शीर्ष 500 कंपनियों की पहचान की है। वे इन कंपनियों और आप जैसे आवेदकों के बीच की कड़ी हैं। मंत्रालय कंपनियों को रिक्तियां पोस्ट करने के लिए मंच देता है। वे आपके दस्तावेजों का सत्यापन भी इसी सिस्टम के जरिए करते हैं। वजीफे का जो हिस्सा सरकार देती है, वह एमसीए ही आपके बैंक खाते में भेजता है। मंत्रालय शिकायत निवारण का काम भी देखता है। उनकी जिम्मेदारी है कि आपको सही समय पर भुगतान मिले।

अन्य मंत्रालयों का सहयोग

एमसीए इस योजना का नेतृत्व करता है, लेकिन वह अकेले काम नहीं करता। वित्त मंत्रालय इस योजना के लिए बजट आवंटित करता है। वे डायरेक्ट बेनिफिट ट्रांसफर (DBT) की निगरानी करते हैं। श्रम और रोजगार मंत्रालय भी इसमें सहयोग करता है। वे यह सुनिश्चित करते हैं कि श्रम कानूनों का पालन हो। कौशल विकास और उद्यमिता मंत्रालय भी एक भूमिका निभाता है। वे यह देखते हैं कि इंटर्नशिप के दौरान आपको जो सिखाया जा रहा है, वह मानकों के अनुरूप है। यह एक सामूहिक प्रयास है। सभी मंत्रालय मिलकर यह सुनिश्चित करते हैं कि आपको एक बेहतर भविष्य मिले।

CSR मॉडल कैसे काम करता है

इस योजना की रीढ़ सीएसआर (Corporate Social Responsibility) है। कंपनी अधिनियम 2013 के तहत, मुनाफा कमाने वाली बड़ी कंपनियों को अपनी कमाई का कुछ हिस्सा सामाजिक कार्यों पर खर्च करना होता है। सरकार ने इस नियम का चतुराई से उपयोग किया है।

  • कंपनियां इंटर्नशिप का खर्च अपने सीएसआर फंड से निकालती हैं।
  • आपको मिलने वाले 5000 रुपये में से 500 रुपये कंपनी देती है।
  • यह 500 रुपये और प्रशिक्षण का खर्च सीएसआर में गिना जाता है।
  • इससे कंपनियों पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ नहीं पड़ता।
  • सरकार शेष 4500 रुपये देती है।

यह मॉडल कंपनियों को भी प्रेरित करता है। वे सामाजिक दायित्व पूरा करते हुए अपने लिए भविष्य के कर्मचारी तैयार कर लेती हैं।

पीएम इंटर्नशिप स्कीम का पायलट प्रोजेक्ट क्या है?

सरकार ने इस विशाल योजना को एक साथ लागू करने के बजाय चरणों में शुरू किया। इसे ही पायलट प्रोजेक्ट कहा जाता है। इस पायलट चरण की शुरुआत 3 अक्टूबर 2024 को हुई। आप इसे एक ‘ट्रायल रन’ मान सकते हैं। सरकार ने वित्तीय वर्ष 2024-25 के लिए 1.25 लाख युवाओं को इंटर्नशिप देने का लक्ष्य रखा। इसके लिए 800 करोड़ रुपये का बजट अलग रखा गया। यह मुख्य योजना का एक छोटा रूप है। इसका उद्देश्य पूरी प्रणाली की जांच करना है। सरकार देखना चाहती है कि जमीनी स्तर पर यह योजना कैसे काम करती है।

पायलट प्रोजेक्ट क्यों जरूरी था

किसी भी बड़ी योजना में तकनीकी दिक्कतें आ सकती हैं। एक साथ करोड़ों आवेदन आने पर पोर्टल क्रैश हो सकता था। पायलट प्रोजेक्ट इस जोखिम को कम करता है। सरकार पोर्टल की क्षमता परखना चाहती थी। उन्हें यह सुनिश्चित करना था कि कंपनियों और आवेदकों का डेटा सही से मैच हो। भुगतान प्रणाली (DBT) की जांच भी जरूरी थी। अगर सीधे बड़े स्तर पर लागू किया जाता, तो छोटी गलती भी बड़ी समस्या बन सकती थी। यह चरण गलतियों को सुधारने का मौका देता है। आप इसे फाइनल एग्जाम से पहले की तैयारी मान सकते हैं।

पहले चरण में कितने युवाओं को मौका

सरकार ने इस चरण में 1.25 लाख युवाओं को जोड़ने का लक्ष्य रखा था। कंपनियों का उत्साह उम्मीद से ज्यादा था। 500 से अधिक कंपनियों ने हिस्सा लिया। इन कंपनियों ने 1.27 लाख से अधिक इंटर्नशिप के अवसर प्रदान किए। युवाओं की प्रतिक्रिया भी जबरदस्त थी। 1 लाख 55 हजार से ज्यादा उम्मीदवारों ने आवेदन किया। यह दिखाता है कि आप और आपके जैसे युवा इस मौके का इंतजार कर रहे थे। चयन प्रक्रिया में कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) का इस्तेमाल हुआ। उम्मीदवारों को उनकी योग्यता और पसंद के आधार पर शॉर्टलिस्ट किया गया।

पायलट फेज से क्या सीखा जाएगा

यह चरण सरकार को महत्वपूर्ण डेटा देगा।

  • पोर्टल की कमियां: रजिस्ट्रेशन या डॉक्यूमेंट अपलोड में कहां दिक्कत आ रही है।
  • कंपनियों का अनुभव: क्या कंपनियों को सही उम्मीदवार मिल रहे हैं।
  • भुगतान प्रक्रिया: क्या वजीफा समय पर बैंक खातों में पहुंच रहा है।
  • क्षेत्रीय मांग: किस राज्य या शहर में इंटर्नशिप की मांग सबसे ज्यादा है।

इन जानकारियों के आधार पर मुख्य योजना में सुधार किया जाएगा। सरकार नियमों को और सरल बना सकती है। पायलट प्रोजेक्ट की सफलता ही अगले 5 वर्षों का रोडमैप तय करेगी।

पीएम इंटर्नशिप योजना में कितनी अवधि की इंटर्नशिप होगी?

पीएम इंटर्नशिप योजना के तहत इंटर्नशिप की अवधि पूरे 12 महीने तय की गई है। यह कोई ग्रीष्मकालीन (Summer) प्रशिक्षण नहीं है जो एक या दो महीने में खत्म हो जाए। सरकार ने इसे एक साल का पूर्णकालिक कार्यक्रम बनाया है। आपको पूरे वर्ष एक कंपनी के साथ जुड़ा रहना होगा। यह अवधि आपको कंपनी के कल्चर में ढलने का पूरा मौका देती है। आप इस दौरान एक नियमित कर्मचारी की तरह काम करते हैं।

12 महीने की इंटर्नशिप का मतलब

बारह महीने का समय किसी भी कौशल को सीखने के लिए पर्याप्त होता है। आप कंपनी के कामकाज के पूरे चक्र को देखते हैं। आप वित्तीय वर्ष की शुरुआत से लेकर अंत तक की प्रक्रियाओं को समझते हैं। इसका मतलब है कि कंपनी आप पर निवेश करेगी। वे आपको केवल फाइलें संभालने के लिए नहीं रखेंगे। वे आपको जिम्मेदारी सौंपेंगे। आपको पूरे एक साल तक मासिक वजीफा मिलेगा। यह आपको आर्थिक सुरक्षा देता है ताकि आप सीखने पर ध्यान केंद्रित कर सकें।

शॉर्ट-टर्म बनाम लॉन्ग-टर्म इंटर्नशिप

आमतौर पर कॉलेज के दौरान आप 4 से 6 सप्ताह की इंटर्नशिप करते हैं। इसे शॉर्ट-टर्म इंटर्नशिप कहते हैं। इसमें आप केवल चीजों को ऊपर से देखते हैं। आप गहराई में नहीं जा पाते। पीएम इंटर्नशिप योजना लॉन्ग-टर्म है।

  • गहराई: शॉर्ट-टर्म में आप “पर्यटक” होते हैं, लॉन्ग-टर्म में आप “निवासी” बन जाते हैं।
  • भरोसा: कंपनियां कम समय के लिए आए इंटर्न को बड़े प्रोजेक्ट नहीं देतीं। 12 महीने होने पर वे आपको महत्वपूर्ण काम सौंपती हैं।
  • नेटवर्किंग: लंबे समय तक रहने से आप मजबूत पेशेवर संबंध बनाते हैं।
  • पहचान: आपकी मेहनत को पहचाना जाता है और नौकरी मिलने के अवसर बढ़ते हैं।

एक साल में क्या-क्या सीखने को मिलेगा

इस योजना के दिशानिर्देश स्पष्ट हैं। कंपनियों को आपको वास्तविक काम सिखाना होगा। इंटर्नशिप का कम से कम आधा समय (6 महीने) वास्तविक कामकाजी माहौल में बिताना अनिवार्य है।

  • व्यावहारिक कौशल: आप मशीनें चलाना, सॉफ्टवेयर इस्तेमाल करना या ग्राहकों को संभालना सीखते हैं।
  • सॉफ्ट स्किल्स: आप टीम में काम करना, समय का पालन करना और संवाद करना सीखते हैं।
  • समस्या समाधान: आप रीयल-टाइम समस्याओं को देखते हैं और उन्हें सुलझाते हैं।
  • इंडस्ट्री का ज्ञान: आप अपनी किताबों से बाहर निकलकर बाजार की हकीकत को समझते हैं।

पीएम इंटर्नशिप स्कीम में सैलरी (Stipend) कितनी मिलेगी?

आपको इस योजना के तहत मिलने वाली राशि को वेतन नहीं, बल्कि वजीफा (Stipend) कहा जाता है। यह वजीफा आपको आर्थिक रूप से स्वतंत्र बनाने के लिए है। सरकार ने यह सुनिश्चित किया है कि आप इंटर्नशिप के दौरान अपनी बुनियादी जरूरतें पूरी कर सकें। आपको हर महीने कुल 5,000 रुपये मिलेंगे। यह राशि सीधे आपके बैंक खाते में आएगी। इसमें कोई बिचौलिया नहीं होगा। आपको यह राशि पूरे 12 महीने तक मिलती रहेगी।

₹5,000 प्रति माह का ब्रेक-अप

यह 5,000 रुपये की राशि दो अलग-अलग स्रोतों से आती है। इसे समझना आपके लिए जरूरी है।

  • सरकार का हिस्सा: 4,500 रुपये। यह राशि सरकार डायरेक्ट बेनिफिट ट्रांसफर (DBT) के जरिए देती है। यह सीधे आपके आधार से जुड़े बैंक खाते में आती है।
  • कंपनी का हिस्सा: 500 रुपये। यह राशि वह कंपनी देती है जहां आप इंटर्नशिप कर रहे हैं। कंपनी इसे अपने सीएसआर फंड से देती है।

कंपनी अपनी सुविधा के अनुसार आपको 500 रुपये से ज्यादा भी दे सकती है। लेकिन न्यूनतम 500 रुपये देना अनिवार्य है। इसका मतलब है कि हर महीने आपके खाते में कम से कम 5,000 रुपये जरूर आएंगे।

₹6,000 जॉइनिंग असिस्टेंस क्या है

मासिक वजीफे के अलावा आपको एकमुश्त राशि भी मिलती है। इसे ‘इंसिडेंटल ग्रांट’ या जॉइनिंग असिस्टेंस कहते हैं। यह राशि 6,000 रुपये है। जब आप अपनी इंटर्नशिप शुरू करते हैं और कंपनी में ज्वाइन करते हैं, तब यह राशि आपको दी जाती है। सरकार जानती है कि नई जगह काम शुरू करने में खर्च आता है।

  • आपको नए शहर में शिफ्ट होना पड़ सकता है।
  • आपको आने-जाने के लिए पास बनवाना हो सकता है।
  • आपको ऑफिस के कपड़ों या जूतों की जरूरत हो सकती है।

यह 6,000 रुपये इन्हीं शुरुआती खर्चों को कवर करने के लिए हैं। यह राशि पूरी तरह से सरकार द्वारा दी जाती है।

कुल मिलाकर साल भर में कितनी रकम

अगर आप पूरे साल की गणना करें तो यह एक अच्छी रकम बनती है।

  • मासिक वजीफा: 5,000 x 12 महीने = 60,000 रुपये।
  • एकमुश्त सहायता: 6,000 रुपये।
  • कुल राशि: 66,000 रुपये।

आपको एक साल में कुल 66,000 रुपये की आर्थिक सहायता मिलती है। इसके अलावा, आपको प्रधानमंत्री जीवन ज्योति बीमा योजना और प्रधानमंत्री सुरक्षा बीमा योजना के तहत बीमा कवर भी मिलता है। यह पैकेज एक छात्र के लिए बहुत मददगार है। आप सीखते भी हैं और कमाते भी हैं।

पीएम इंटर्नशिप योजना में पैसा कहां से आएगा?

यह योजना सरकारी और निजी क्षेत्र की साझेदारी का एक बेहतरीन उदाहरण है। इसका खर्च उठाने के लिए सरकार ने एक अनोखा मॉडल तैयार किया है। इसमें सारा बोझ न तो सरकार पर है और न ही कंपनियों पर। दोनों मिलकर इस योजना को फंड कर रहे हैं। यह पब्लिक-प्राइवेट पार्टनरशिप (PPP) जैसा मॉडल है। सरकार ने इसके लिए बजट में विशेष प्रावधान किए हैं। साथ ही, कंपनियों के पास मौजूद सामाजिक जिम्मेदारी फंड का भी इस्तेमाल किया जा रहा है।

CSR फंड का रोल

बड़ी कंपनियों को अपने मुनाफे का एक हिस्सा समाज सेवा में खर्च करना होता है। इसे कॉरपोरेट सोशल रिस्पॉन्सिबिलिटी (CSR) फंड कहते हैं। सरकार ने नियमों में बदलाव किया है ताकि कंपनियां इस फंड का इस्तेमाल इंटर्नशिप के लिए कर सकें।

  • कंपनियां इंटर्नशिप का खर्च इसी फंड से निकालेंगी।
  • इंटर्न की ट्रेनिंग पर होने वाला खर्च भी इसी में शामिल माना जाएगा।
  • कंपनी जो 500 रुपये का हिस्सा देती है, वह भी CSR से ही आएगा।
  • प्रशासनिक खर्च (Admin Cost) का 5% तक कंपनियां CSR से खर्च कर सकती हैं।

यह प्रावधान कंपनियों के लिए इस योजना को आकर्षक बनाता है। उन्हें अपनी जेब से अलग से पैसा नहीं लगाना पड़ता। वे अपने अनिवार्य CSR लक्ष्य को भी इसके जरिए पूरा कर लेती हैं।

सरकार और कंपनियों की हिस्सेदारी

पैसों का बंटवारा बहुत स्पष्ट है। सबसे बड़ा हिस्सा सरकार वहन करती है।

  • सरकार: हर महीने 4,500 रुपये देती है। इसके अलावा 6,000 रुपये की एकमुश्त राशि भी सरकार देती है।
  • कंपनियां: हर महीने 500 रुपये देती हैं। इसके साथ ही ट्रेनिंग की लागत और आकस्मिक खर्च भी कंपनी उठाती है।

प्रतिशत में देखें तो वजीफे का 90% हिस्सा सरकार दे रही है और 10% हिस्सा कंपनी दे रही है। कंपनी चाहे तो अपने हिस्से को बढ़ा सकती है, लेकिन सरकार का हिस्सा 4,500 रुपये ही रहेगा।

₹800 करोड़ के बजट का पूरा गणित

सरकार ने पायलट प्रोजेक्ट के लिए 800 करोड़ रुपये जारी किए हैं। इसका गणित बहुत सीधा है।

  • लक्ष्य: 1.25 लाख इंटर्न।
  • प्रति इंटर्न सरकारी खर्च:
    • 4,500 रुपये x 12 महीने = 54,000 रुपये।
    • एकमुश्त सहायता = 6,000 रुपये।
    • कुल = 60,000 रुपये प्रति छात्र।
  • कुल वजीफा: 1,25,000 छात्र x 60,000 रुपये = 750 करोड़ रुपये।
  • शेष राशि: बाकी बचे 50 करोड़ रुपये का इस्तेमाल पोर्टल के रखरखाव, जागरूकता अभियान और प्रशासनिक कार्यों के लिए होगा।

इस तरह 800 करोड़ रुपये का यह बजट पूरी तरह से नियोजित है। यह सुनिश्चित करता है कि हर पात्र इंटर्न को उसका पैसा समय पर मिले।

पीएम इंटर्नशिप स्कीम में कौन-कौन आवेदन कर सकता है?

यह योजना सभी के लिए नहीं है। सरकार ने इसके लिए कुछ सख्त नियम बनाए हैं। इसका उद्देश्य केवल उन युवाओं की मदद करना है जिन्हें इसकी सबसे ज्यादा जरूरत है। आपको आवेदन करने से पहले अपनी पात्रता की जांच करनी चाहिए। यदि आप भारतीय नागरिक हैं तो आप आवेदन कर सकते हैं। आपके पास आधार कार्ड होना अनिवार्य है। आपकी शैक्षणिक योग्यता कम से कम हाई स्कूल या इसके समकक्ष होनी चाहिए। आपने आईटीआई, पॉलिटेक्निक डिप्लोमा या ग्रेजुएशन किया हो सकता है। लेकिन आपके पास उच्च पेशेवर डिग्री जैसे सीए या सीएस नहीं होनी चाहिए। आईआईटी और आईआईएम के पासआउट भी इसमें आवेदन नहीं कर सकते।

उम्र सीमा (21–24 साल) का लॉजिक

सरकार ने इस योजना के लिए 21 से 24 वर्ष की आयु सीमा तय की है। यह सीमा बहुत सोच-समझकर रखी गई है।

  • 21 साल: यह वह उम्र है जब ज्यादातर छात्र अपनी बेसिक ग्रेजुएशन या डिप्लोमा पूरा कर लेते हैं।
  • 24 साल: यह करियर शुरू करने की अंतिम सीमा मानी जाती है।

इस आयु वर्ग के युवा ‘ट्रांजिशन फेज’ में होते हैं। वे पढ़ाई खत्म कर चुके होते हैं लेकिन नौकरी में सेटल नहीं हुए होते। सरकार का फोकस इसी समूह पर है। अगर आप 21 से कम हैं, तो माना जाता है कि आप अभी भी पढ़ रहे हैं। अगर आप 24 से ऊपर हैं, तो सरकार मानती है कि आपको इंटर्नशिप नहीं, बल्कि सीधी नौकरी की जरूरत है।

फुल-टाइम जॉब और पढ़ाई से जुड़ी शर्तें

आप एक साथ दो जगहों पर नहीं हो सकते। इसलिए इस योजना में स्पष्ट शर्त है। यदि आप वर्तमान में पूर्णकालिक (Full-time) नौकरी कर रहे हैं, तो आप आवेदन नहीं कर सकते। यह योजना बेरोजगार युवाओं के लिए है। इसी तरह, यदि आप पूर्णकालिक शिक्षा में हैं, तो आप पात्र नहीं हैं।

  • अगर आप रोज कॉलेज जाते हैं, तो आप इंटर्नशिप नहीं कर सकते।
  • इंटर्नशिप के लिए आपको हफ्ते में 6 दिन ऑफिस जाना होगा।
  • पढ़ाई और ऑफिस एक साथ संभव नहीं है।

यह नियम सुनिश्चित करता है कि आप अपना पूरा ध्यान काम सीखने पर लगाएं। सरकार नहीं चाहती कि आपकी पढ़ाई या काम में से किसी का भी नुकसान हो।

ऑनलाइन एजुकेशन वाले उम्मीदवार क्यों योग्य हैं

सरकार ने ऑनलाइन और डिस्टेंस लर्निंग के छात्रों को छूट दी है। यदि आप ओपन यूनिवर्सिटी से पढ़ाई कर रहे हैं, तो आप आवेदन कर सकते हैं। यदि आप कोई ऑनलाइन कोर्स कर रहे हैं, तो भी आप पात्र हैं। इसका कारण बहुत व्यावहारिक है।

  • ऑनलाइन कोर्स में आपको कॉलेज जाने की जरूरत नहीं होती।
  • आप अपनी पढ़ाई शाम को या छुट्टी के दिन कर सकते हैं।
  • आपके पास दिन में ऑफिस जाने का समय होता है।

सरकार चाहती है कि आप अपनी डिग्री जारी रखें और साथ में अनुभव भी लें। यह लचीलापन आपको एक साथ दो चीजें हासिल करने का मौका देता है। आप अपनी डिग्री भी पूरी करते हैं और कॉर्पोरेट अनुभव भी लेते हैं।

पीएम इंटर्नशिप योजना के लिए शैक्षणिक योग्यता

इस योजना की सबसे बड़ी खासियत इसकी व्यापकता है। सरकार ने इसके दरवाजे केवल उच्च शिक्षित युवाओं के लिए नहीं खोले हैं। इसमें कम पढ़ा-लिखा युवा भी आवेदन कर सकता है। आपके पास कोई बहुत बड़ी डिग्री होना जरूरी नहीं है। बुनियादी शिक्षा या तकनीकी डिप्लोमा वाले भी इसके लिए पात्र हैं। सरकार का मानना है कि हुनर किसी डिग्री का मोहताज नहीं होता। आप अपनी योग्यता के अनुसार अलग-अलग भूमिकाओं के लिए आवेदन कर सकते हैं।

10वीं / 12वीं पास उम्मीदवार

अगर आपने केवल स्कूल की पढ़ाई पूरी की है, तो भी आप निराश न हों। हाई स्कूल (10वीं) पास युवा इस योजना में आवेदन करने के लिए न्यूनतम योग्य हैं। इंटरमीडिएट (12वीं) पास छात्र भी पूरी तरह पात्र हैं। कई कंपनियां ऐसे रोल ऑफर करती हैं जहां बड़ी डिग्री की नहीं, बल्कि सीखने की ललक की जरूरत होती है।

  • रिटेल सेक्टर: आप शोरूम या स्टोर मैनेजमेंट का काम सीख सकते हैं।
  • लॉजिस्टिक्स: आप सप्लाई चेन और वेयरहाउसिंग को समझ सकते हैं।
  • ऑपरेशंस: आप ऑफिस असिस्टेंट या डेटा एंट्री जैसे कार्यों में मदद कर सकते हैं।

यह उन छात्रों के लिए सुनहरा मौका है जो आर्थिक कारणों से कॉलेज नहीं जा पाए। आप सीधे काम सीखकर अपने करियर की शुरुआत कर सकते हैं।

ITI और पॉलिटेक्निक छात्रों के अवसर

तकनीकी शिक्षा वाले छात्रों के लिए यह योजना एक बेहतरीन अवसर है। अगर आपने आईटीआई (ITI) किया है, तो आपके लिए मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर में ढेरों मौके हैं। पॉलिटेक्निक डिप्लोमा धारकों की मांग भी बहुत ज्यादा है। कंपनियां आपको सीधे मशीनों और प्रोजेक्ट्स पर काम करने का मौका देंगी।

  • आप ऑटोमोबाइल कंपनियों में असेंबली लाइन का काम देख सकते हैं।
  • इलेक्ट्रॉनिक्स और हार्डवेयर इंडस्ट्री में आपकी तकनीकी समझ काम आएगी।
  • कंस्ट्रक्शन और टेक्सटाइल सेक्टर में भी डिप्लोमा होल्डर्स की जरूरत है।

यह सामान्य अप्रेंटिसशिप से कहीं बेहतर है। यहां आप देश की टॉप 500 कंपनियों के वर्क कल्चर को अनुभव करेंगे।

ग्रेजुएट (BA, BSc, BCom, BBA, BCA, B.Pharma आदि)

सामान्य ग्रेजुएशन करने वाले छात्रों को अक्सर नौकरी मिलने में सबसे ज्यादा संघर्ष करना पड़ता है। बी.ए., बी.एससी या बी.कॉम वालों के लिए बाजार में सीधे विकल्प सीमित होते हैं। यह योजना विशेष रूप से आपके लिए ही डिजाइन की गई है। सरकार ने लगभग हर स्ट्रीम के ग्रेजुएट को इसमें शामिल किया है।

  • BBA/BCom: आप फाइनेंस, अकाउंटिंग और मैनेजमेंट का काम सीख सकते हैं।
  • BCA: आप आईटी सपोर्ट, नेटवर्क मैनेजमेंट और डिजिटल ऑपरेशंस में जा सकते हैं।
  • B.Pharma: आप फार्मास्यूटिकल कंपनियों में लैब असिस्टेंट या क्वालिटी कंट्रोल का काम देख सकते हैं।
  • BA/BSc: आप एचआर, एडमिनिस्ट्रेशन, सेल्स या मार्केटिंग में हाथ आजमा सकते हैं।

डिग्री पूरी करने के बाद खाली बैठने से बेहतर है कि आप यह इंटर्नशिप करें। यह आपके बायोडाटा में एक साल का ठोस अनुभव जोड़ देगा।

पीएम इंटर्नशिप योजना में कौन आवेदन नहीं कर सकता?

सरकार ने इस योजना के लिए पात्रता के नियम बहुत सख्त रखे हैं। हर युवा इस योजना का लाभ नहीं उठा सकता। इसका उद्देश्य उन लोगों तक पहुंचना है जिन्हें वास्तव में मदद की जरूरत है। यदि आप पहले से ही सुरक्षित या संपन्न हैं, तो आप इसके लिए पात्र नहीं हैं। सरकार ने एक “निगेटिव लिस्ट” बनाई है। यदि आप इस लिस्ट में आते हैं, तो आप आवेदन नहीं कर सकते। आपको आवेदन करने से पहले इन शर्तों को ध्यान से पढ़ना चाहिए।

₹8 लाख से अधिक पारिवारिक आय

यह योजना आर्थिक रूप से कमजोर और मध्यम वर्ग के लिए है। सरकार ने इसके लिए एक आय सीमा निर्धारित की है। यदि आपके परिवार की वार्षिक आय 8 लाख रुपये से अधिक है, तो आप आवेदन नहीं कर सकते।

  • वित्तीय वर्ष: यह आय वित्त वर्ष 2023-24 के आधार पर देखी जाएगी।
  • परिवार की परिभाषा: इसमें आप, आपके माता-पिता और पति/पत्नी शामिल हैं।
  • सरकारी नौकरी: यदि आपके परिवार का कोई भी सदस्य स्थायी सरकारी कर्मचारी है, तो आप अयोग्य हैं।

सरकार का मानना है कि उच्च आय वाले परिवार अपने बच्चों के करियर का खर्च उठा सकते हैं। यह वजीफा उन छात्रों के लिए है जो आर्थिक तंगी के कारण आगे नहीं बढ़ पा रहे हैं।

फुल-टाइम नौकरी करने वाले

यह योजना बेरोजगारों के लिए एक सहारा है। यदि आप पहले से नौकरी कर रहे हैं, तो आप किसी और का हक नहीं मार सकते। औपचारिक रूप से नियोजित कोई भी व्यक्ति इसमें आवेदन नहीं कर सकता।

  • यदि आपका पीएफ (PF) या ईएसआई (ESI) कट रहा है, तो सिस्टम आपको पकड़ लेगा।
  • यदि आप किसी कंपनी में फुल-टाइम काम कर रहे हैं, तो आप पात्र नहीं हैं।
  • यदि आप स्वरोजगार (Self-employed) में हैं और अच्छी कमाई कर रहे हैं, तो आपको दूर रहना चाहिए।

सरकार चाहती है कि यह अवसर उसे मिले जिसके पास अभी कोई रोजगार नहीं है। एक साथ दो लाभ लेना नियमों के खिलाफ है।

कुछ प्रोफेशनल डिग्री धारक

कुछ डिग्रियां ऐसी होती हैं जिनके बाद नौकरी मिलना आसान होता है। सरकार ने ऐसे उच्च शिक्षित युवाओं को इस योजना से बाहर रखा है। यदि आपने आईआईटी (IIT), आईआईएम (IIM) या एनआईडी (NID) जैसे शीर्ष संस्थानों से पढ़ाई की है, तो आप आवेदन नहीं कर सकते। इसके अलावा, यदि आपके पास ये डिग्रियां हैं, तो आप पात्र नहीं हैं:

  • सीए (CA), सीएस (CS), सीएमए (CMA)।
  • एमबीबीएस (MBBS), बीडीएस (BDS)।
  • एमबीए (MBA) या मास्टर डिग्री।
  • पीएचडी (Ph.D.)।

इन कोर्सेस में इंटर्नशिप पहले से ही शामिल होती है या इनकी बाजार में भारी मांग है। यह योजना सामान्य स्नातकों (B.A., B.Sc, B.Com) और डिप्लोमा धारकों को ऊपर उठाने के लिए है।

पीएम इंटर्नशिप योजना में आरक्षण नियम कैसे लागू होंगे?

सरकार ने इस योजना में सामाजिक न्याय का पूरा ध्यान रखा है। यह योजना केवल योग्यता पर आधारित नहीं है। इसमें प्रतिनिधित्व को भी महत्व दिया गया है। सरकार सुनिश्चित करती है कि समाज के हर वर्ग को आगे बढ़ने का मौका मिले। इसलिए, पीएम इंटर्नशिप योजना में भारत सरकार के आरक्षण नियम पूरी तरह लागू होते हैं। आप जिस भी वर्ग से आते हैं, आपको आपका हक मिलेगा। पोर्टल का एल्गोरिदम इस तरह डिजाइन किया गया है कि आरक्षित सीटों पर केवल पात्र उम्मीदवार ही चुने जाएं।

केंद्र सरकार के आरक्षण नियम

इस योजना में सीटों का बंटवारा केंद्र सरकार के रोस्टर के अनुसार किया गया है। कुल सीटों का एक बड़ा हिस्सा आरक्षित श्रेणियों के लिए रखा गया है।

  • अनुसूचित जाति (SC): 15% सीटें आरक्षित हैं।
  • अनुसूचित जनजाति (ST): 7.5% सीटें आरक्षित हैं।
  • अन्य पिछड़ा वर्ग (OBC): 27% सीटें आरक्षित हैं।
  • आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग (EWS): 10% सीटें आरक्षित हैं।
  • दिव्यांगजन (PWD): इनके लिए भी क्षैतिज (Horizontal) आरक्षण का प्रावधान है।

यह बंटवारा सुनिश्चित करता है कि कोई भी वर्ग पीछे न रहे। कंपनियों को इन आंकड़ों का पालन करते हुए ही उम्मीदवारों का चयन करना होगा।

SC / ST / OBC / EWS उम्मीदवारों को लाभ

यदि आप इन आरक्षित श्रेणियों में आते हैं, तो आपके लिए चयन की संभावना बढ़ जाती है। आपको सामान्य श्रेणी की भीड़ में नहीं खोना पड़ेगा। आप अपनी श्रेणी के उम्मीदवारों के बीच प्रतिस्पर्धा करेंगे।

  • SC/ST: आपके लिए सीटें फिक्स हैं। इससे आपको शीर्ष कंपनियों में प्रवेश करने का सीधा रास्ता मिलता है।
  • OBC: 27% आरक्षण एक बड़ा हिस्सा है। यह ग्रामीण और अर्ध-शहरी क्षेत्रों के युवाओं के लिए गेम-चेंजर है।
  • EWS: यदि आप सामान्य श्रेणी से हैं लेकिन आर्थिक रूप से कमजोर हैं, तो 10% कोटा आपके लिए संजीवनी है।

यह व्यवस्था आपको कॉर्पोरेट जगत में पहला कदम रखने में मदद करती है। अक्सर इन वर्गों के युवाओं को नेटवर्क की कमी के कारण मौके नहीं मिलते। यह आरक्षण उस कमी को पूरा करता है।

सामाजिक समानता का पहलू

निजी क्षेत्र में अक्सर आरक्षण लागू नहीं होता है। लेकिन यह योजना सरकारी पैसे और सहयोग से चल रही है। इसलिए सरकार ने यहां हस्तक्षेप किया है। इसका उद्देश्य कॉर्पोरेट इंडिया का चेहरा बदलना है। सरकार चाहती है कि बोर्ड रूम और ऑफिस में भारत की विविधता दिखे।

  • यह योजना वंचित वर्गों को मुख्यधारा में लाती है।
  • यह अमीर और गरीब के बीच की खाई को कम करती है।
  • यह पिछड़े क्षेत्रों के युवाओं को मेट्रो शहरों के कल्चर से जोड़ती है।

जब अलग-अलग परिवेश के युवा एक साथ काम करते हैं, तो सबका विकास होता है। यह आरक्षण केवल एक नियम नहीं है। यह सामाजिक बदलाव का एक औजार है।

पीएम इंटर्नशिप स्कीम में बीमा सुविधा क्या मिलेगी?

सरकार आपकी आर्थिक सुरक्षा के साथ-साथ आपके जीवन की सुरक्षा को लेकर भी गंभीर है। जब आप घर से बाहर निकलकर काम करते हैं, तो जोखिम हमेशा रहता है। पीएम इंटर्नशिप स्कीम में आपको एक व्यापक सुरक्षा कवच मिलता है। सरकार ने सुनिश्चित किया है कि हर इंटर्न का बीमा हो। आपको इसके लिए अपनी जेब से प्रीमियम नहीं भरना होगा। यह सुविधा आपको और आपके परिवार को मानसिक शांति देती है। आप बिना किसी डर के अपने काम पर ध्यान केंद्रित कर सकते हैं।

प्रधानमंत्री जीवन ज्योति बीमा योजना (PMJJBY)

यह योजना आपके जीवन को कवर करती है। इसे आप एक टर्म लाइफ इंश्योरेंस मान सकते हैं।

  • कवर: 2 लाख रुपये।
  • शर्त: किसी भी कारण से मृत्यु होने पर कवरेज मिलता है। चाहे वह बीमारी हो या दुर्घटना।
  • लाभार्थी: यदि इंटर्न के साथ कोई अनहोनी होती है, तो यह राशि उसके नॉमिनी (परिवार) को मिलती है।

यह योजना इंटर्नशिप की अवधि के दौरान लागू रहेगी। यह सुनिश्चित करता है कि आपके परिवार के पास एक आर्थिक सहारा हो। युवाओं के लिए यह एक महत्वपूर्ण सुरक्षा है।

प्रधानमंत्री सुरक्षा बीमा योजना (PMSBY)

काम के दौरान दुर्घटना का खतरा हो सकता है। आप फैक्ट्री में मशीनों पर काम कर सकते हैं या साइट पर जा सकते हैं। प्रधानमंत्री सुरक्षा बीमा योजना आपको इसी जोखिम से बचाती है।

  • दुर्घटना मृत्यु: दुर्घटना में मृत्यु होने पर 2 लाख रुपये मिलते हैं।
  • पूर्ण विकलांगता: दोनों आंखें या दोनों हाथ-पैर खोने पर 2 लाख रुपये मिलते हैं।
  • आंशिक विकलांगता: एक आंख या एक अंग की हानि होने पर 1 लाख रुपये मिलते हैं।

यह बीमा सड़क दुर्घटनाओं और कार्यस्थल पर होने वाली दुर्घटनाओं दोनों को कवर करता है। यह आपको उपचार और पुनर्वास के लिए आर्थिक मदद देता है।

कंपनियों द्वारा अतिरिक्त बीमा

सरकार द्वारा दिए गए बीमा के अलावा, कंपनियां भी आपको सुरक्षा दे सकती हैं। चूंकि आप टॉप 500 कंपनियों में काम करेंगे, उनके मानक ऊंचे होते हैं।

  • मेडिकल इंश्योरेंस: कई कंपनियां इंटर्न को भी स्वास्थ्य बीमा (Mediclaim) देती हैं। यह बीमारी के इलाज का खर्च उठाता है।
  • वर्कप्लेस एक्सीडेंट: यदि फैक्ट्री के अंदर चोट लगती है, तो कंपनी उसका इलाज कराती है।
  • ग्रुप इंश्योरेंस: कुछ कंपनियां अपने सभी कर्मचारियों के साथ इंटर्न को भी ग्रुप पॉलिसी में शामिल करती हैं।

आपको अपने ऑफर लेटर में इन अतिरिक्त सुविधाओं की जांच करनी चाहिए। अच्छी कंपनियां अपने इंटर्न की सेहत का पूरा ख्याल रखती हैं।

पीएम इंटर्नशिप योजना के लिए रजिस्ट्रेशन डेट्स

किसी भी सरकारी योजना में समय का बहुत महत्व होता है। पीएम इंटर्नशिप योजना में आवेदन की एक निश्चित समय सीमा होती है। यदि आप तारीख चूक जाते हैं, तो आपको अगले चक्र का इंतजार करना होगा। सरकार ने इस प्रक्रिया को बहुत व्यवस्थित रखा है। पोर्टल केवल एक निर्धारित अवधि के लिए खुलता है। आपको अपडेट रहने के लिए आधिकारिक पोर्टल ‘pminternship.mca.gov.in’ पर नजर रखनी चाहिए। यहां हम पायलट प्रोजेक्ट की समयसीमा के आधार पर आपको इस चक्र के बारे में बता रहे हैं।

आवेदन शुरू और अंतिम तिथि

इस योजना की समयसीमा बहुत सख्त है। सरकार आपको सोचने के लिए बहुत लंबा समय नहीं देती। आपको तैयार रहना होगा। पायलट चरण के दौरान निम्नलिखित शेड्यूल का पालन किया गया था।

  • कंपनियों का पंजीकरण: यह प्रक्रिया सबसे पहले शुरू होती है। कंपनियां 3 अक्टूबर से अपनी वैकेंसी पोस्ट करना शुरू करती हैं।
  • उम्मीदवारों का पंजीकरण: युवाओं के लिए विंडो 12 अक्टूबर को खुली।
  • अंतिम तिथि: आवेदन करने की आखिरी तारीख 25 अक्टूबर तय की गई थी।

आपको आवेदन करने के लिए लगभग दो सप्ताह का समय मिलता है। आखिरी दिन का इंतजार न करें। भारी ट्रैफिक के कारण सर्वर धीमा हो सकता है। जैसे ही पोर्टल खुले, अपना फॉर्म भर दें।

मेरिट लिस्ट और चयन प्रक्रिया

आवेदन बंद होने के बाद असली काम शुरू होता है। सरकार ने चयन प्रक्रिया को पारदर्शी बनाने के लिए एआई (AI) का उपयोग किया है। इसमें कोई मानवीय हस्तक्षेप नहीं है।

  • शॉर्टलिस्टिंग: सिस्टम आपकी योग्यता और कंपनी की मांग को मैच करता है।
  • अनुपात: एक वैकेंसी के लिए सिस्टम तीन उम्मीदवारों को शॉर्टलिस्ट करता है।
  • कंपनी का चयन: कंपनी इन तीन नामों में से किसी एक को चुनती है।
  • ऑफर लेटर: अगर कंपनी आपको चुनती है, तो आपको पोर्टल पर ऑफर लेटर दिखाई देगा।

यह पूरी प्रक्रिया अक्टूबर के अंत और नवंबर की शुरुआत में पूरी हो जाती है। आपको अपनी ईमेल और मैसेज चेक करते रहना चाहिए।

इंटर्नशिप जॉइन करने की टाइमलाइन

चयन होने के बाद सब कुछ बहुत तेजी से होता है। सरकार चाहती है कि आप जल्द से जल्द काम शुरू करें।

  • ऑफर स्वीकार करना: आपको ऑफर लेटर मिलने के बाद उसे स्वीकार करने के लिए 7 से 10 दिन का समय मिलता है (जैसे 8 से 15 नवंबर तक)।
  • ज्वाइनिंग: अंतिम प्रक्रिया पूरी होने के बाद, इंटर्नशिप की शुरुआत 2 दिसंबर से होती है।

यह पूरा चक्र अक्टूबर से दिसंबर के बीच चलता है। महज दो महीने के भीतर आप बेरोजगार से एक इंटर्न बन जाते हैं। यह गति सरकारी योजनाओं में दुर्लभ है। आपको अपने दस्तावेज और सामान पहले से तैयार रखने चाहिए ताकि आप तुरंत ज्वाइन कर सकें।

पीएम इंटर्नशिप योजना में चयन प्रक्रिया कैसे होगी?

इस योजना की चयन प्रक्रिया सरकारी नौकरियों की भर्ती से बिल्कुल अलग है। इसमें लंबी लाइनें और एडमिट कार्ड का इंतजार नहीं होता। पूरी प्रक्रिया तकनीक आधारित और तेज है। सरकार ने एक सेंट्रलाइज्ड पोर्टल बनाया है। यह पोर्टल आपके और कंपनी के बीच एक मैचमेकर का काम करता है। आपको बस अपनी जानकारी सही-सही भरनी है। बाकी काम सिस्टम और कंपनियां करती हैं। इसमें पारदर्शिता बहुत अधिक है। आपको हर अपडेट पोर्टल पर या एसएमएस के जरिए मिलता रहता है।

कोई परीक्षा क्यों नहीं

सरकारी योजनाओं में अक्सर लिखित परीक्षा होती है। लेकिन पीएम इंटर्नशिप योजना में कोई परीक्षा नहीं है। इसके पीछे एक ठोस कारण है।

  • उद्देश्य: यह नौकरी नहीं, प्रशिक्षण है। सरकार आपकी रटने की क्षमता नहीं, बल्कि सीखने की ललक देखना चाहती है।
  • समय की बचत: परीक्षाएं आयोजित करने और रिजल्ट देने में महीनों लग जाते हैं। सरकार चाहती है कि आप तुरंत काम शुरू करें।
  • उद्योग की मांग: प्राइवेट सेक्टर में नंबरों से ज्यादा व्यक्तित्व और कौशल मायने रखता है।

परीक्षा न होने से दबाव कम हो जाता है। आप रिलैक्स होकर अपनी खूबियों को प्रोफाइल में दिखा सकते हैं। यह प्रक्रिया को सरल और सुलभ बनाता है।

कंपनियों द्वारा चयन का तरीका

चयन प्रक्रिया दो स्तरों पर काम करती है। सबसे पहले पोर्टल का एल्गोरिदम काम करता है। इसके बाद कंपनी का रोल आता है।

  • शॉर्टलिस्टिंग: पोर्टल स्वचालित रूप से आपकी योग्यता और लोकेशन के आधार पर आपको शॉर्टलिस्ट करता है। एक वैकेंसी के लिए सिस्टम 3 गुना उम्मीदवारों (जैसे 1 सीट के लिए 3 लोग) का नाम कंपनी को भेजता है।
  • रिव्यू: कंपनी के एचआर (HR) विभाग के पास यह लिस्ट जाती है। वे आपकी प्रोफाइल देखते हैं।
  • इंटरव्यू: कंपनी आपको चुनने से पहले फोन पर बात कर सकती है। वे छोटा इंटरव्यू भी ले सकते हैं। यह पूरी तरह कंपनी पर निर्भर करता है।
  • फाइनल सेलेक्शन: कंपनी अपनी पसंद के उम्मीदवार को सेलेक्ट करती है और पोर्टल पर ऑफर लेटर जारी करती है।

मेरिट और प्रोफाइल का महत्व

चूंकि कोई परीक्षा नहीं है, इसलिए आपका पिछला रिकॉर्ड बहुत मायने रखता है। आपका प्रोफाइल ही आपका बायोडाटा है।

  • अकादमिक रिकॉर्ड: आपके 10वीं, 12वीं या आईटीआई के नंबर पहले फिल्टर का काम करते हैं। अच्छे नंबर आपकी गंभीरता दिखाते हैं।
  • प्रोफाइल डिटेल्स: आपने पोर्टल पर अपनी रुचियां कैसे भरी हैं, यह महत्वपूर्ण है। अगर आप मैन्युफैक्चरिंग में जाना चाहते हैं, तो आपकी प्रोफाइल उससे मेल खानी चाहिए।
  • लोकेशन: कंपनियां अक्सर स्थानीय उम्मीदवारों को प्राथमिकता देती हैं। इससे रहने-खाने की समस्या कम होती है।

आपको अपना फॉर्म बहुत सावधानी से भरना चाहिए। एक छोटी सी गलती आपको रेस से बाहर कर सकती है। सही जानकारी ही आपके चयन की चाबी है।

पीएम इंटर्नशिप योजना की आधिकारिक वेबसाइट

इस पूरी प्रक्रिया का केंद्र एक ही वेबसाइट है। वह है pminternship.mca.gov.in। आपको आवेदन करने के लिए किसी सरकारी दफ्तर में जाने की जरूरत नहीं है। सरकार ने सारी प्रक्रिया को डिजिटल बना दिया है। इंटरनेट पर कई फर्जी वेबसाइट हो सकती हैं जो मिलती-जुलती दिखती हैं। आपको उनसे सावधान रहना चाहिए। केवल इसी आधिकारिक लिंक का उपयोग करें। यह पोर्टल आपके और कंपनियों के बीच की एकमात्र कड़ी है। आपकी इंटर्नशिप यात्रा की शुरुआत और अंत यहीं होता है।

pminternship.mca.gov.in का परिचय

यह पोर्टल कॉरपोरेट कार्य मंत्रालय (MCA) द्वारा संचालित है। इसे विशेष रूप से इस योजना के लिए डिजाइन किया गया है। इसका इंटरफेस बहुत साफ और सीधा है।

  • सेंट्रलाइज्ड सिस्टम: यहां सभी 500 पार्टनर कंपनियां और लाखों आवेदक एक साथ मौजूद हैं।
  • सुरक्षित डेटा: चूंकि यह एक सरकारी पोर्टल है, आपका डेटा पूरी तरह सुरक्षित रहता है।
  • पारदर्शिता: हर कदम पर आपको अपडेट मिलता है। कुछ भी छिपाया नहीं जाता।

आपको अपना आधार नंबर और शैक्षणिक दस्तावेज इसी पोर्टल पर अपलोड करने होते हैं। कंपनियों द्वारा जारी किए गए ऑफर लेटर भी आपको यहीं मिलेंगे।

पोर्टल पर मिलने वाली सुविधाएं

यह वेबसाइट केवल फॉर्म भरने की जगह नहीं है। यह एक पूरा प्रबंधन तंत्र है। यहां आपको कई महत्वपूर्ण सुविधाएं मिलती हैं।

  • स्मार्ट सर्च: आप अपनी पसंद के राज्य, जिले या सेक्टर के हिसाब से इंटर्नशिप खोज सकते हैं।
  • डैशबोर्ड: लॉग इन करने के बाद आपको एक डैशबोर्ड मिलता है। यहां आप अपने आवेदन की स्थिति ट्रैक कर सकते हैं।
  • ई-केवाईसी (e-KYC): आप डिजीलॉकर के माध्यम से अपने दस्तावेजों का सत्यापन यहीं कर सकते हैं।
  • हेल्पडेस्क: पोर्टल पर टोल-फ्री नंबर (1800-116-090) और ईमेल सपोर्ट की जानकारी उपलब्ध है।
  • शिकायत निवारण: यदि आपको कोई समस्या आती है, तो आप पोर्टल के माध्यम से अपनी शिकायत दर्ज करा सकते हैं।

छात्रों के लिए यूजर-फ्रेंडली सिस्टम

सरकार जानती है कि हर छात्र तकनीक में माहिर नहीं होता। इसलिए पोर्टल को बहुत सरल बनाया गया है।

  • मोबाइल फ्रेंडली: आप अपने मोबाइल फोन से भी आसानी से आवेदन कर सकते हैं। आपको कंप्यूटर की जरूरत नहीं है।
  • स्वचालित मिलान: आपको हजारों नौकरियों को छानने की जरूरत नहीं है। पोर्टल का एआई (AI) आपकी प्रोफाइल के अनुसार आपको सर्वश्रेष्ठ विकल्प दिखाता है।
  • सरल भाषा: निर्देश बहुत स्पष्ट भाषा में लिखे गए हैं।
  • कम डेटा खपत: वेबसाइट हल्की है और कम इंटरनेट स्पीड पर भी अच्छी तरह काम करती है।

यह सिस्टम आपको अनावश्यक उलझनों से बचाता है। आप रजिस्ट्रेशन से लेकर ज्वाइनिंग तक सब कुछ घर बैठे कर सकते हैं।

पीएम इंटर्नशिप योजना में ऑनलाइन रजिस्ट्रेशन कैसे करें?

इस योजना में आवेदन करने का केवल एक ही तरीका है, और वह है ऑनलाइन। आपको किसी भी सरकारी दफ्तर में कागज जमा करने नहीं जाना है। पूरी प्रक्रिया पेपरलेस है। आप इसे अपने घर बैठे स्मार्टफोन या लैपटॉप से पूरा कर सकते हैं। इसके लिए आपके पास एक सक्रिय मोबाइल नंबर और ईमेल आईडी होना जरूरी है। फॉर्म भरने से पहले अपने सभी दस्तावेज अपने पास रख लें। प्रक्रिया सरल है लेकिन इसमें सटीकता बहुत जरूरी है। एक छोटी सी गलती आपका आवेदन खारिज करा सकती है।

Step-by-Step पूरा प्रोसेस

रजिस्ट्रेशन प्रक्रिया को आप इन आसान चरणों में पूरा कर सकते हैं।

  1. वेबसाइट पर जाएं: सबसे पहले आधिकारिक पोर्टल pminternship.mca.gov.in खोलें।
  2. रजिस्टर बटन: होमपेज पर दिख रहे “Register” विकल्प पर क्लिक करें।
  3. विवरण भरें: अपना मोबाइल नंबर और आधार नंबर दर्ज करें।
  4. OTP सत्यापन: आपके मोबाइल पर एक वन टाइम पासवर्ड (OTP) आएगा। इसे दर्ज करें।
  5. पासवर्ड सेट करें: भविष्य में लॉग इन करने के लिए एक मजबूत पासवर्ड बनाएं।
  6. लॉग इन करें: अब अपने रजिस्टर्ड नंबर और पासवर्ड से पोर्टल पर लॉग इन करें।
  7. प्रोफाइल पूरा करें: अपनी शिक्षा, कौशल और पते की जानकारी भरें।
  8. आवेदन करें: अपनी पसंद के क्षेत्र और स्थान के अनुसार इंटर्नशिप सर्च करें और अप्लाई करें। आप अधिकतम 5 विकल्पों के लिए आवेदन कर सकते हैं।

OTP और e-KYC प्रक्रिया

सरकार फर्जी आवेदनों को रोकने के लिए e-KYC का उपयोग करती है। यह स्टेप अनिवार्य है। इसके बिना आपका फॉर्म सबमिट नहीं होगा।

  • आधार लिंक: आपका मोबाइल नंबर आपके आधार कार्ड से लिंक होना चाहिए। OTP उसी नंबर पर आता है जो आधार डेटाबेस में है।
  • डिजीलॉकर (DigiLocker): पोर्टल आपके दस्तावेजों की जांच डिजीलॉकर के जरिए करता है। यदि आपका खाता नहीं है, तो प्रक्रिया के दौरान यह अपने आप बन जाएगा।
  • सहमति: आपको अपना डेटा साझा करने की अनुमति देनी होगी। सिस्टम आपके 10वीं, 12वीं और अन्य सर्टिफिकेट को सीधे बोर्ड या यूनिवर्सिटी के सर्वर से फेच (Fetch) करता है।
  • चेहरा पहचान: कुछ मामलों में आधार डेटाबेस से आपकी फोटो का मिलान किया जाता है।

यह तकनीक सुनिश्चित करती है कि कोई भी व्यक्ति गलत दस्तावेजों के आधार पर नौकरी न पाए।

प्रोफाइल भरते समय ध्यान देने योग्य बातें

प्रोफाइल ही आपका डिजिटल बायोडाटा है। इसे भरते समय इन बातों का विशेष ध्यान रखें।

  • बैंक सीडिंग: जिस बैंक खाते में आप वजीफा चाहते हैं, वह आधार से सीड (Seed) होना चाहिए। इसे बैंक जाकर चेक कर लें। DBT का पैसा केवल आधार-सीडेड खाते में आता है।
  • सही कौशल चुनें: ‘Skills’ सेक्शन में वही चुनें जो आपको आता है। पोर्टल इसी आधार पर आपको कंपनियां सुझाएगा।
  • लोकेशन का चुनाव: अपने गृह जिले या उसके आसपास के जिलों को प्राथमिकता दें। दूसरे शहर में 5000 रुपये में गुजारा करना मुश्किल हो सकता है।
  • संपर्क विवरण: अपना ईमेल और फोन नंबर वही दें जो सक्रिय हो। सारी सूचनाएं इन्हीं पर आएंगी।
  • दस्तावेज: अगर डिजीलॉकर से मार्कशीट नहीं मिल रही, तो साफ स्कैन की गई कॉपी अपलोड करें। धुंधले दस्तावेज रिजेक्ट हो सकते हैं।

पीएम इंटर्नशिप योजना के लिए जरूरी दस्तावेज

आवेदन करने से पहले आपको अपने दस्तावेज तैयार रखने चाहिए। बिना सही दस्तावेजों के आप फॉर्म पूरा नहीं कर पाएंगे। सरकार आपकी पात्रता की जांच इन्हीं कागजों के आधार पर करती है। यह पूरी प्रक्रिया डिजिटल है। आपको कहीं भी फाइल लेकर दौड़ने की जरूरत नहीं है। आपको बस अपनी स्कैन की हुई कॉपी या डिजिटल फाइलें अपलोड करनी होती हैं। यदि आपके दस्तावेजों में कमी पाई गई, तो आपका चयन रद्द हो सकता है। इसलिए पहले से तैयारी करना समझदारी है।

आधार, आय प्रमाण पत्र, शिक्षा प्रमाण पत्र

आपके पास दस्तावेजों का एक पूरा सेट होना चाहिए।

  • आधार कार्ड: यह सबसे महत्वपूर्ण दस्तावेज है। यह आपकी पहचान और पते का प्रमाण है। ध्यान रखें कि इसमें आपका मोबाइल नंबर अपडेट हो।
  • शिक्षा प्रमाण पत्र: आपको अपनी योग्यता साबित करनी होगी। 10वीं और 12वीं की मार्कशीट अनिवार्य है। यदि आपने आईटीआई, डिप्लोमा या ग्रेजुएशन किया है, तो उनके सर्टिफिकेट भी तैयार रखें।
  • आय प्रमाण पत्र: यह योजना आर्थिक रूप से कमजोर वर्गों के लिए है। आपको यह साबित करना होगा कि आपके परिवार की आय 8 लाख रुपये से कम है। इसके लिए वैध आय प्रमाण पत्र जरूरी है।
  • पासपोर्ट साइज फोटो: आपकी एक हालिया और साफ फोटो होनी चाहिए।
  • हस्ताक्षर: आपको एक सफेद कागज पर हस्ताक्षर करके उसे स्कैन करना होगा।

यदि आपके पास डिजीलॉकर खाता है, तो काम और आसान हो जाता है। पोर्टल सीधे वहां से दस्तावेज उठा लेता है।

बैंक डिटेल्स क्यों जरूरी हैं

सरकार आपको पैसे नकद नहीं देगी। वजीफे की राशि सीधे आपके बैंक खाते में भेजी जाएगी। इसे डायरेक्ट बेनिफिट ट्रांसफर (DBT) कहते हैं। इसलिए आपकी बैंक डिटेल्स एकदम सटीक होनी चाहिए।

  • आधार सीडिंग: केवल खाता होना काफी नहीं है। आपका बैंक खाता आपके आधार नंबर से जुड़ा (Seeded) होना चाहिए। सरकार आधार नंबर के जरिए ही पैसे भेजती है।
  • सक्रिय खाता: सुनिश्चित करें कि आपका खाता सक्रिय है। अगर वह लंबे समय से बंद है, तो लेनदेन विफल हो जाएगा।
  • KYC: बैंक में आपकी केवाईसी पूरी होनी चाहिए।

गलत बैंक डिटेल्स देने का मतलब है कि आप अपनी मेहनत की कमाई खो देंगे। पैसा किसी और के खाते में नहीं जा सकता। खाता आपके ही नाम पर होना चाहिए।

डॉक्यूमेंट अपलोड में होने वाली गलतियां

अक्सर छात्र फॉर्म भरते समय जल्दबाजी करते हैं। छोटी-छोटी गलतियां बड़े नुकसान का कारण बनती हैं।

  • धुंधले दस्तावेज: यदि स्कैन की गई कॉपी साफ नहीं है, तो सिस्टम उसे पढ़ नहीं पाएगा। आपका आवेदन खारिज हो जाएगा। हमेशा साफ और अच्छी रोशनी में स्कैन करें।
  • गलत फॉर्मेट: पोर्टल पीडीएफ (PDF) या जेपीईजी (JPEG) फॉर्मेट मांगता है। साइज लिमिट का भी ध्यान रखें। बहुत बड़ी फाइल अपलोड नहीं होगी।
  • नाम में अंतर: आपके आधार कार्ड और मार्कशीट में नाम की स्पेलिंग एक होनी चाहिए। अगर अंतर है, तो पहले उसे ठीक कराएं।
  • पुराने दस्तावेज: आय प्रमाण पत्र वर्तमान वित्तीय वर्ष का होना चाहिए। पुराना सर्टिफिकेट मान्य नहीं होगा।

डॉक्यूमेंट अपलोड करने के बाद ‘Preview’ जरूर करें। सबमिट बटन दबाने से पहले दो बार चेक करना हमेशा बेहतर होता है।

पीएम इंटर्नशिप योजना में मोबाइल ऐप का रोल

सरकार जानती है कि आज का युवा तकनीकी रूप से सक्षम है। हर युवा के पास लैपटॉप या कंप्यूटर नहीं होता। लेकिन स्मार्टफोन आज गांव-गांव तक पहुंच चुका है। इसी बात को ध्यान में रखते हुए पीएम इंटर्नशिप योजना को मोबाइल-फ्रेंडली बनाया गया है। सरकार ने एक समर्पित मोबाइल ऐप और मोबाइल-अनुकूलित पोर्टल की सुविधा दी है। इसका मकसद है कि रोजगार का यह अवसर आपकी जेब में हो। आपको किसी साइबर कैफे के चक्कर न काटने पड़ें। आप चलते-फिरते अपनी नौकरी का रास्ता खोज सकें।

मोबाइल ऐप क्यों लॉन्च किया गया

इस ऐप को लॉन्च करने के पीछे सबसे बड़ा कारण ‘सुगमता’ (Accessibility) है। सरकार चाहती है कि प्रक्रिया पारदर्शी और तेज हो।

  • पहुंच: दूर-दराज के क्षेत्रों में रहने वाले छात्रों के पास कंप्यूटर नहीं होता। मोबाइल ऐप उन्हें शहर के छात्रों के बराबर खड़ा करता है।
  • तेजी: वेब पोर्टल पर बार-बार लॉग इन करना मुश्किल हो सकता है। ऐप एक बार लॉग इन करने के बाद हमेशा सक्रिय रहता है।
  • रियल-टाइम अपडेट: इंटर्नशिप में समय बहुत कीमती होता है। ऑफर लेटर आने पर आपको तुरंत पता चलना चाहिए। ऐप यह काम बखूबी करता है।

यह डिजिटल इंडिया पहल का एक हिस्सा है। सरकार चाहती है कि आवेदन से लेकर चयन तक की प्रक्रिया आपकी उंगलियों पर हो।

युवाओं को क्या फायदे होंगे

मोबाइल ऐप छात्रों के लिए एक वरदान की तरह है। यह कई जटिलताओं को खत्म कर देता है।

  • कहीं से भी आवेदन: आप बस में सफर करते हुए या पार्क में बैठे हुए भी आवेदन कर सकते हैं।
  • पुश नोटिफिकेशन: जैसे ही कोई कंपनी आपको शॉर्टलिस्ट करती है, आपके फोन पर घंटी बजती है। आप कोई भी मौका नहीं चूकते।
  • दस्तावेज अपलोड: आपको स्कैनर की जरूरत नहीं है। आप ऐप के जरिए अपने फोन के कैमरे से फोटो खींचकर मार्कशीट अपलोड कर सकते हैं।
  • स्टेटस ट्रैकिंग: आप अपने आवेदन की स्थिति बार-बार चेक कर सकते हैं। आपको पता रहता है कि आपकी फाइल कहां रुकी है।
  • आसान इंटरफेस: ऐप का डिजाइन बहुत सरल होता है। इसे कम तकनीकी ज्ञान वाला व्यक्ति भी आसानी से चला सकता है।

भविष्य में ऐप से मिलने वाली सुविधाएं

यह ऐप अभी शुरुआती चरण में है। आने वाले समय में इसमें कई हाई-टेक फीचर्स जोड़े जाएंगे। यह केवल आवेदन करने का जरिया नहीं रहेगा। यह आपके पूरे इंटर्नशिप कार्यकाल का साथी बनेगा।

  • उपस्थिति दर्ज करना (Attendance): भविष्य में जियो-टैगिंग के जरिए आप अपनी हाजिरी इसी ऐप से लगा सकेंगे।
  • वजीफा ट्रैकिंग: आपके खाते में पैसा कब आया और कितना आया, इसकी पूरी पासबुक ऐप पर दिखेगी।
  • शिकायत निवारण: अगर कंपनी आपको परेशान करती है, तो आप सीधे ऐप से शिकायत दर्ज कर सकेंगे।
  • लर्निंग मॉड्यूल: सरकार इसमें ट्रेनिंग वीडियो और स्किल कोर्स भी जोड़ सकती है।
  • फीडबैक सिस्टम: इंटर्नशिप खत्म होने पर आप कंपनी को रेटिंग दे सकेंगे।

यह ऐप धीरे-धीरे एक वन-स्टॉप सॉल्यूशन बन जाएगा। यह सुनिश्चित करेगा कि आप अपना पूरा ध्यान सीखने पर लगाएं, न कि कागजी कार्रवाई पर।

पीएम इंटर्नशिप स्कीम में किन सेक्टर्स में अवसर मिलेंगे?

यह योजना केवल एक या दो उद्योगों तक सीमित नहीं है। इसमें देश की शीर्ष 500 कंपनियां शामिल हैं। इसका मतलब है कि हर तरह के काम के लिए अवसर मौजूद हैं। चाहे आप तकनीक पसंद करते हों या मशीनों पर काम करना, आपके लिए कुछ न कुछ जरूर है। सरकार ने यह सुनिश्चित किया है कि विविधता बनी रहे। लगभग हर क्षेत्र की कंपनियां इसमें भाग ले रही हैं। आप अपनी रुचि और शिक्षा के अनुसार अपना पसंदीदा सेक्टर चुन सकते हैं। यह आपको एक ही दिशा में बंधने से बचाता है।

IT और टेक्नोलॉजी

आज का युग डिजिटल है। आईटी सेक्टर में इंटर्नशिप के सबसे ज्यादा मौके हैं। अगर आपने बीसीए, कंप्यूटर साइंस या इससे जुड़ा कोई कोर्स किया है, तो यह सेक्टर आपके लिए है। यहां आपको भविष्य की तकनीक सीखने को मिलेगी।

  • सॉफ्टवेयर डेवलपमेंट: आप कोडिंग और ऐप डेवलपमेंट की मूल बातें सीखेंगे।
  • डेटा एनालिटिक्स: आप बड़े डेटा को संभालना और उसका विश्लेषण करना सीखेंगे।
  • हार्डवेयर और नेटवर्किंग: आप कंप्यूटर रिपेयरिंग और नेटवर्क मेंटेनेंस का काम देख सकते हैं।
  • डिजिटल मार्केटिंग: आप सोशल मीडिया मैनेजमेंट और ऑनलाइन ब्रांडिंग समझेंगे।

बड़ी आईटी कंपनियां आपको वैश्विक प्रोजेक्ट्स पर काम करने का अनुभव देंगी। यह अनुभव आपके करियर को नई ऊंचाइयों पर ले जा सकता है।

मैन्युफैक्चरिंग और MSME

भारत सरकार ‘मेक इन इंडिया’ पर जोर दे रही है। मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर में काम करने वालों की भारी मांग है। अगर आपने आईटीआई या पॉलिटेक्निक डिप्लोमा किया है, तो यह सेक्टर आपके लिए स्वर्ग है। यहां आपको एसी कमरों में नहीं, बल्कि फ्लोर पर काम करना होगा।

  • ऑटोमोबाइल: आप कार और बाइक बनाने की प्रक्रिया का हिस्सा बनेंगे।
  • टेक्सटाइल: आप कपड़ा उद्योग में डिजाइन और प्रोडक्शन समझेंगे।
  • इलेक्ट्रॉनिक्स: आप गैजेट्स और उपकरणों की असेंबली लाइन पर काम करेंगे।
  • सप्लाई चेन: आप सीखेंगे कि कच्चा माल कैसे आता है और तैयार माल कैसे बाजार तक पहुंचता है।

एमएसएमई (MSME) सेक्टर भी इससे जुड़ा हुआ है। बड़ी कंपनियां अक्सर छोटे उद्योगों के साथ मिलकर काम करती हैं। आपको पूरे इकोसिस्टम को समझने का मौका मिलेगा।

बैंकिंग, फाइनेंस और सर्विस सेक्टर

अगर आप कॉमर्स या आर्ट्स के छात्र हैं, तो निराश न हों। सर्विस सेक्टर में आपके लिए हजारों मौके हैं। बैंकिंग और फाइनेंस कंपनियां अपने विस्तार के लिए युवाओं को तलाश रही हैं।

  • बैंकिंग: आप खाता खोलना, लोन प्रोसेस करना और ग्राहकों को संभालना सीखेंगे।
  • इंश्योरेंस: आप बीमा पॉलिसियों और रिस्क मैनेजमेंट को समझेंगे।
  • रिटेल: आप बड़े मॉल या सुपरमार्केट में स्टोर मैनेजमेंट का हुनर सीखेंगे।
  • हॉस्पिटैलिटी: होटल और ट्रैवल इंडस्ट्री में अतिथि सेवा का काम सीखने को मिलेगा।

यह सेक्टर पूरी तरह से लोगों से जुड़ने के बारे में है। आप यहां कम्युनिकेशन और सेल्स का हुनर सीखते हैं। यह कौशल किसी भी करियर में काम आता है।

पीएम इंटर्नशिप योजना में टॉप कंपनियों की भूमिका

इस योजना की सफलता पूरी तरह से इसमें शामिल कंपनियों पर निर्भर है। सरकार ने इसमें किसी भी छोटी-मोटी कंपनी को शामिल नहीं किया है। आप देश के कॉर्पोरेट जगत के दिग्गजों के साथ काम करेंगे। ये वे कंपनियां हैं जो भारतीय अर्थव्यवस्था की रीढ़ हैं। इनकी कार्यप्रणाली विश्व स्तर की है। सरकार ने इन कंपनियों को भागीदार बनाकर यह सुनिश्चित किया है कि आपको सर्वोत्तम माहौल मिले। यहां आपको केवल काम नहीं, बल्कि प्रोफेशनलिज्म का पाठ पढ़ाया जाएगा। आपका अनुभव किसी भी सामान्य ट्रेनिंग इंस्टीट्यूट से कहीं बेहतर होगा।

500 टॉप कंपनियों का चयन

सरकार ने इन 500 कंपनियों का चुनाव बहुत सावधानी से किया है। यह कोई यादृच्छिक (Random) लिस्ट नहीं है।

  • आधार: चयन का मुख्य आधार कंपनियों का पिछले तीन वर्षों का औसत सीएसआर खर्च है।
  • विविधता: इस लिस्ट में मैन्युफैक्चरिंग, सर्विस, बैंकिंग और टेक सेक्टर की कंपनियां शामिल हैं।
  • प्रतिष्ठा: ये कंपनियां अपने क्षेत्र में मार्केट लीडर हैं।
  • नेटवर्क: इन कंपनियों की पहुंच पूरे भारत में है, जिससे आपको अपने जिले के पास काम मिल सकता है।

आप रिलायंस, टाटा, महिंद्रा और एचडीएफसी जैसे बड़े नामों के साथ जुड़ सकते हैं। इन ब्रांड्स का नाम आपके सीवी (CV) पर बहुत वजन डालता है।

CSR के आधार पर कंपनियां

सीएसआर (Corporate Social Responsibility) इस चयन प्रक्रिया की कुंजी है। केवल वे कंपनियां चुनी गई हैं जो सामाजिक कार्यों पर भारी खर्च करती हैं। इसका सीधा मतलब है कि उनके पास संसाधन हैं।

  • संसाधन: ज्यादा सीएसआर खर्च करने वाली कंपनियों के पास ट्रेनिंग के लिए बेहतर बजट होता है।
  • स्थिरता: ये आर्थिक रूप से मजबूत हैं, इसलिए आपका वजीफा कभी नहीं रुकेगा।
  • बुनियादी ढांचा: आपको काम करने के लिए आधुनिक ऑफिस और मशीनें मिलेंगी।

सरकार जानती है कि छोटी कंपनियां 12 महीने तक इंटर्न का खर्च नहीं उठा सकतीं। इसलिए केवल बड़े खिलाड़ियों को मैदान में उतारा गया है। वे इसे बोझ नहीं, बल्कि एक जिम्मेदारी मानकर निभा रहे हैं।

इंडस्ट्री-रेडी ट्रेनिंग

कॉलेज आपको थ्योरी सिखाता है, लेकिन ये कंपनियां आपको इंडस्ट्री के लिए तैयार करती हैं। यहां की ट्रेनिंग किताबों से बिल्कुल अलग होगी।

  • मेंटरशिप: आपको एक अनुभवी कर्मचारी (Mentor) के साथ जोड़ा जाएगा जो आपको गाइड करेगा।
  • प्रोजेक्ट्स: आप डमी नहीं, बल्कि लाइव प्रोजेक्ट्स पर काम करेंगे।
  • तकनीक: आप उन सॉफ्टवेयर और टूल्स का इस्तेमाल करेंगे जो अभी बाजार में चल रहे हैं।
  • अनुशासन: आप कॉर्पोरेट शिष्टाचार, ईमेल लिखना और मीटिंग अटेंड करना सीखेंगे।

12 महीने बाद आप एक फ्रेशर नहीं रहेंगे। आप एक ऐसे पेशेवर होंगे जिसे पता है कि काम कैसे होता है। कंपनियां आपको इस तरह ट्रेन करेंगी कि आप भविष्य में उन्हीं के पास या किसी और बड़ी कंपनी में नौकरी पा सकें।

पीएम इंटर्नशिप योजना से युवाओं को क्या फायदा होगा?

यह योजना आपके करियर के लिए एक टर्निंग पॉइंट साबित हो सकती है। यह केवल एक सरकारी भत्ता पाने का जरिया नहीं है। यह आपके भविष्य में निवेश है। सबसे बड़ी समस्या जो आज का युवा झेलता है, वह है अनुभव की कमी। यह योजना उस कमी को पूरी तरह खत्म कर देती है। आपको सीखने के पैसे मिलते हैं। आप घर पर बैठने के बजाय एक उत्पादक वातावरण में समय बिताते हैं। यह आपको आत्मविश्वास देता है। आप अपने पैरों पर खड़े होते हैं और अपने परिवार का सहारा बनते हैं।

प्रैक्टिकल एक्सपीरियंस

कॉलेज की पढ़ाई और ऑफिस के काम में जमीन-आसमान का फर्क होता है। यह योजना आपको वह सिखाती है जो किताबें नहीं सिखा सकतीं। आप वास्तविक दुनिया की चुनौतियों का सामना करते हैं।

  • हैंड्स-ऑन ट्रेनिंग: आप केवल थ्योरी नहीं पढ़ते, बल्कि मशीनों और सॉफ्टवेयर पर खुद काम करते हैं।
  • ऑफिस कल्चर: आप सीखते हैं कि एक पेशेवर माहौल में कैसे व्यवहार करना है।
  • टीम वर्क: आप अलग-अलग लोगों के साथ मिलकर काम करना सीखते हैं।
  • दबाव प्रबंधन: आप डेडलाइन पर काम पूरा करने का हुनर सीखते हैं।

यह अनुभव आपको परिपक्व बनाता है। जब आप 12 महीने बाद बाहर निकलेंगे, तो आप एक नौसिखिए नहीं होंगे।

रिज़्यूमे में वैल्यू

आज के दौर में सादे कागज की डिग्री काफी नहीं है। नियोक्ताओं के पास हजारों आवेदन आते हैं। आपके पास कुछ ऐसा होना चाहिए जो आपको अलग दिखाए। टॉप 500 कंपनियों का नाम आपके बायोडाटा (Resume) में चार चांद लगा देता है।

  • ब्रांड वैल्यू: जब आपके सीवी पर टाटा, महिंद्रा या रिलायंस जैसी कंपनी का नाम होता है, तो रिक्रूटर उसे ध्यान से पढ़ता है।
  • प्रमाणित अनुभव: आपको 12 महीने का अनुभव प्रमाण पत्र मिलता है। यह साबित करता है कि आपने एक साल तक टिक कर काम किया है।
  • प्रतिस्पर्धा में बढ़त: फ्रेशर्स की भीड़ में आपके पास एक साल का कॉर्पोरेट अनुभव होगा। यह आपको लाइन में सबसे आगे खड़ा करता है।

नौकरी के बेहतर अवसर

यह इंटर्नशिप आपके लिए रोजगार के दरवाजे खोलती है। इंटर्नशिप खत्म होने के बाद आपको नौकरी ढूंढने में आसानी होगी।

  • सीधी भर्ती: अगर आपका काम अच्छा रहा, तो वही कंपनी आपको स्थायी नौकरी (Permanent Job) ऑफर कर सकती है। कंपनियों के लिए यह एक आजमाया हुआ तरीका है।
  • बाजार मूल्य: प्रशिक्षित कर्मचारी की मांग हमेशा रहती है। दूसरी कंपनियां आपको फ्रेशर के मुकाबले ज्यादा सैलरी देने को तैयार होंगी।
  • नेटवर्क: आप इंटर्नशिप के दौरान कई पेशेवरों से मिलते हैं। ये संपर्क भविष्य में आपको अच्छी नौकरी दिलाने में मदद कर सकते हैं।

आप बेरोजगारी के चक्र से बाहर निकल जाते हैं। आप ‘जॉब सीकर’ से ‘जॉब रेडी’ प्रोफेशनल बन जाते हैं।

ग्रामीण और शहरी युवाओं के लिए पीएम इंटर्नशिप योजना

यह योजना शहर और गांव के बीच की दूरी को मिटाने का काम करती है। अक्सर रोजगार के अच्छे अवसर केवल महानगरों तक सीमित रह जाते हैं। ग्रामीण युवाओं को लगता है कि उन्हें सफल होने के लिए अपना घर छोड़ना ही पड़ेगा। पीएम इंटर्नशिप योजना इस सोच को बदल रही है। सरकार ने सुनिश्चित किया है कि इंटर्नशिप के अवसर देश के हर कोने में उपलब्ध हों। चाहे आप मुंबई में हों या किसी छोटे कस्बे में, अवसर आपके दरवाजे तक पहुंच रहा है। यह विकेंद्रीकरण (Decentralization) भारत की प्रतिभा को निखारने के लिए जरूरी है।

जिले स्तर पर अवसर

आपको इंटर्नशिप करने के लिए दिल्ली, बेंगलुरु या गुरुग्राम जाने की मजबूरी नहीं है। टॉप 500 कंपनियों का नेटवर्क बहुत विशाल है। उनकी शाखाएं, शोरूम, डीलरशिप और प्लांट लगभग हर जिले में मौजूद हैं।

  • बैंक और फाइनेंस: हर जिले में बड़े बैंकों और इंश्योरेंस कंपनियों की शाखाएं हैं।
  • ऑटोमोबाइल: मारुति, टाटा या महिंद्रा के सर्विस सेंटर छोटे शहरों में भी हैं।
  • रिटेल: एफएमसीजी (FMCG) कंपनियों का वितरण नेटवर्क गांव-गांव तक फैला है।

पोर्टल पर आपको जिला-वार सर्च का विकल्प मिलता है। आप अपने गृह जिले या पड़ोसी जिले में उपलब्ध रिक्तियों को चुन सकते हैं। इससे आप अपने परिवार के पास रहकर ही कॉर्पोरेट अनुभव ले सकते हैं।

माइग्रेशन कैसे कम होगा

पलायन (Migration) हमारे देश की एक बड़ी समस्या है। हजारों युवा नौकरी की तलाश में बड़े शहरों की ओर दौड़ते हैं। वहां वे महंगे किराए और भीड़भाड़ में संघर्ष करते हैं। यह योजना इस मजबूर पलायन को रोकती है।

  • लागत में बचत: 5,000 रुपये का वजीफा मेट्रो शहर में कम लग सकता है। लेकिन अगर आप अपने घर पर हैं, तो यह आपकी जेब खर्च के लिए पर्याप्त है।
  • मानसिक शांति: आपको नए शहर में सेटल होने का तनाव नहीं झेलना पड़ता।
  • स्थानीय विकास: जब युवा अपने शहर में रुकेंगे, तो वहां का विकास होगा।

सरकार चाहती है कि आप हुनरमंद बनकर ही बाहर निकलें। जब आपके पास अनुभव होगा, तो आप अपनी शर्तों पर बड़े शहर जा सकते हैं, मजबूरी में नहीं।

लोकल इंडस्ट्री को फायदा

यह केवल आपके फायदे की बात नहीं है। इससे स्थानीय उद्योगों और कंपनियों की इकाइयों को भी लाभ होता है। टियर-2 और टियर-3 शहरों में अक्सर कुशल युवाओं की कमी होती है।

  • लोकल टैलेंट: कंपनियों को ऐसे युवा मिलते हैं जो स्थानीय भाषा और संस्कृति को समझते हैं।
  • कम एट्रिशन (Attrition): स्थानीय कर्मचारी अक्सर लंबी अवधि तक टिके रहते हैं। वे जल्दी नौकरी छोड़कर भागते नहीं हैं।
  • भविष्य की तैयारी: कंपनियां अपने भविष्य के वर्कफोर्स को अपने ही इलाके में तैयार कर लेती हैं।

यह इकोसिस्टम को मजबूत बनाता है। जब स्थानीय स्तर पर कुशल लोग उपलब्ध होते हैं, तो और भी कंपनियां वहां आने के लिए प्रेरित होती हैं। यह छोटे शहरों की अर्थव्यवस्था को नई गति देता है।

पीएम इंटर्नशिप योजना बनाम प्राइवेट इंटर्नशिप

जब आप करियर की शुरुआत करते हैं तो आपके सामने दो रास्ते होते हैं। पहला रास्ता है खुद मेहनत करके किसी निजी कंपनी में इंटर्नशिप ढूंढना। दूसरा रास्ता है पीएम इंटर्नशिप योजना के जरिए आवेदन करना। इन दोनों में बहुत बड़ा अंतर है। निजी इंटर्नशिप अक्सर असंगठित होती है। वहां नियमों की कमी होती है। पीएम इंटर्नशिप योजना एक संरचित कार्यक्रम है। यहां सब कुछ लिखित नियमों के तहत होता है। आपको यह समझना जरूरी है कि यह सरकारी योजना कैसे सामान्य प्राइवेट इंटर्नशिप से बेहतर और सुरक्षित है।

सरकारी और प्राइवेट मॉडल का फर्क

सबसे बड़ा अंतर पहुंच और पारदर्शिता का है। प्राइवेट इंटर्नशिप अक्सर ‘जुगाड़’ या सिफारिश से मिलती है। अगर आपके पास नेटवर्क नहीं है, तो अच्छे मौके हाथ से निकल जाते हैं। पीएम इंटर्नशिप योजना में ऐसा नहीं है।

  • समान अवसर: यहां चयन एल्गोरिदम और मेरिट पर आधारित है। किसी की सिफारिश काम नहीं करती।
  • अवधि: प्राइवेट इंटर्नशिप अक्सर 2 या 3 महीने की होती है। आप काम सीखना शुरू करते हैं और समय खत्म हो जाता है। पीएम स्कीम में आपको पूरे 12 महीने मिलते हैं।
  • स्पष्टता: प्राइवेट में अक्सर आपको कॉफी लाने या फोटोकॉपी करने जैसे काम दिए जाते हैं। पीएम स्कीम में कंपनियों को स्पष्ट निर्देश हैं। उन्हें आपको वास्तविक काम (Hands-on experience) सिखाना ही होगा।

प्राइवेट मॉडल कंपनी की मर्जी पर चलता है। सरकारी मॉडल नियमों पर चलता है। यहां कंपनी की जवाबदेही तय की गई है।

स्टाइपेंड और सिक्योरिटी

आर्थिक सुरक्षा के मामले में पीएम योजना का पलड़ा भारी है। भारत में हजारों प्राइवेट इंटर्नशिप ‘अनपेड’ (Unpaid) होती हैं। कंपनियां कहती हैं कि ‘सीखने को मिल रहा है, यही काफी है’। यह शोषण है। पीएम इंटर्नशिप योजना आपको इस शोषण से बचाती है।

  • गारंटीड भुगतान: आपको हर महीने 5,000 रुपये मिलना तय है। प्राइवेट इंटर्नशिप में भुगतान में देरी हो सकती है या वादा खिलाफी हो सकती है। यहां पैसा सरकार और सीएसआर फंड से सुरक्षित है।
  • बीमा कवच: प्राइवेट इंटर्नशिप में शायद ही कोई कंपनी आपको बीमा देती हो। अगर काम करते वक्त चोट लग जाए, तो खर्च आपको उठाना पड़ता है। पीएम स्कीम में आपको जीवन और दुर्घटना बीमा (PMJJBY और PMSBY) पहले दिन से मिलता है।
  • जॉइनिंग बोनस: 6,000 रुपये का एकमुश्त भत्ता केवल इसी योजना में मिलता है। कोई भी प्राइवेट कंपनी इंटर्न को सेटल होने के लिए अलग से पैसे नहीं देती।

लॉन्ग-टर्म बेनिफिट

इंटर्नशिप खत्म होने के बाद क्या होगा? यह सवाल सबसे अहम है। प्राइवेट इंटर्नशिप का प्रमाण पत्र कई बार काम नहीं आता। अगर कंपनी छोटी या अनजान है, तो दूसरे नियोक्ता उसे महत्व नहीं देते।

  • ब्रांड वैल्यू: पीएम स्कीम में केवल टॉप 500 कंपनियां हैं। इनका सर्टिफिकेट गोल्ड स्टैम्प जैसा है। यह आपके बायोडाटा को हमेशा के लिए मजबूत कर देता है।
  • पहचान: 12 महीने का अनुभव किसी भी जॉब के लिए ‘फ्रेशर’ टैग हटाने के लिए काफी है। 2 महीने की प्राइवेट इंटर्नशिप को अक्सर अनुभव नहीं माना जाता।
  • भविष्य के मौके: सरकार इन कंपनियों को प्रोत्साहित कर रही है कि वे अच्छे इंटर्न्स को नौकरी पर रख लें। प्राइवेट इंटर्नशिप में ‘प्लेसमेंट ऑफर’ (PPO) मिलना बहुत मुश्किल होता है।

पीएम इंटर्नशिप योजना आपको केवल एक सर्टिफिकेट नहीं देती। यह आपको एक ठोस करियर पाथ देती है। यह आपको भीड़ से निकालकर एक प्रीमियम श्रेणी में खड़ा कर देती है।

पीएम इंटर्नशिप योजना से भारत के रोजगार बाजार पर असर

यह योजना भारतीय रोजगार बाजार के इतिहास में एक महत्वपूर्ण मोड़ है। अब तक सरकारें केवल सरकारी नौकरियां निकालने पर ध्यान देती थीं। यह पहली बार है जब सरकार ने निजी क्षेत्र की क्षमता का उपयोग किया है। इसका असर केवल एक साल तक सीमित नहीं रहेगा। यह आने वाले दशकों के लिए भारत के वर्कफोर्स को बदल देगा। यह योजना डिग्री और कौशल के बीच की खाई को पाट रही है। बाजार में अब केवल डिग्री दिखाने वालों की नहीं, बल्कि काम जानने वालों की बाढ़ आएगी।

स्किल्ड वर्कफोर्स

भारत के पास दुनिया की सबसे बड़ी युवा आबादी है। लेकिन एक कड़वी सच्चाई यह है कि हमारे पास ‘स्किल्ड’ लोगों की कमी है। डिग्री धारक बहुत हैं, लेकिन हुनरमंद कम हैं। यह योजना इस समीकरण को ठीक करती है।

  • तैयार टैलेंट: कंपनियां अक्सर फ्रेशर्स को ट्रेनिंग देने में कतराती हैं। इस योजना के बाद उन्हें बाजार में ऐसे युवा मिलेंगे जो पहले से ही 12 महीने काम कर चुके हैं।
  • मानक प्रशिक्षण: जब युवा टॉप 500 कंपनियों से सीखेंगे, तो उनके काम का स्तर ऊंचा होगा। छोटे शहरों के युवा भी मल्टीनेशनल कंपनी (MNC) के मानकों को समझेंगे।
  • उत्पादकता: एक प्रशिक्षित कर्मचारी पहले दिन से ही कंपनी को मुनाफा देना शुरू कर देता है। इससे पूरे देश की उत्पादकता बढ़ती है।

यह योजना भारत को दुनिया की ‘स्किल कैपिटल’ बनाने की दिशा में ठोस कदम है।

बेरोजगारी पर प्रभाव

बेरोजगारी का एक बड़ा कारण ‘एम्प्लॉयबिलिटी’ (रोजगार योग्यता) की कमी है। युवा काम करना चाहते हैं, लेकिन उन्हें काम आता नहीं है। यह योजना इस समस्या की जड़ पर वार करती है।

  • अनुभव का चक्रव्यूह: फ्रेशर्स अक्सर सुनते हैं- “नौकरी के लिए अनुभव चाहिए, और अनुभव के लिए नौकरी।” यह योजना इस चक्रव्यूह को तोड़ती है। यह आपको वह पहला अनुभव देती है।
  • तत्काल राहत: 1 करोड़ युवाओं को इंटर्नशिप देने का लक्ष्य बहुत बड़ा है। यह सीधे तौर पर बेरोजगारी के आंकड़ों को कम करेगा।
  • आत्मविश्वास: जब युवा व्यस्त रहता है और कमाता है, तो उसका मनोबल ऊंचा रहता है। यह सामाजिक असंतोष को भी कम करता है।

यह योजना युवाओं को “नौकरी खोजने वालों” की कतार से निकालकर “नौकरी के लिए तैयार” पेशेवरों की कतार में खड़ा कर देती है।

इंडस्ट्री और इकॉनमी को फायदा

यह सोचना गलत है कि इससे केवल छात्रों का भला होगा। यह भारतीय उद्योग जगत के लिए भी फायदे का सौदा है।

  • कम लागत: कंपनियों को सरकार की मदद से कम लागत पर मैनपावर मिल रहा है। वे बिना बड़ा निवेश किए अपनी भविष्य की टीम तैयार कर सकते हैं।
  • प्रतिभा की पहचान: कंपनियां इंटर्नशिप के दौरान ही अच्छे लोगों को पहचान लेती हैं। इससे उनकी भर्ती प्रक्रिया (Hiring Process) का खर्च बचता है।
  • आर्थिक चक्र: जब 1 करोड़ युवाओं के हाथ में पैसा आएगा, तो बाजार में खर्च बढ़ेगा। इससे मांग बढ़ेगी और अर्थव्यवस्था को गति मिलेगी।

यह योजना डेमोग्राफिक डिविडेंड (जनसांख्यिकीय लाभांश) का सही इस्तेमाल है। यह बोझ को संसाधन में बदल देती है।

पीएम इंटर्नशिप योजना से जुड़ी आम गलतफहमियां

किसी भी बड़ी सरकारी योजना के साथ अफवाहें तेजी से फैलती हैं। पीएम इंटर्नशिप योजना को लेकर भी छात्रों के बीच कई गलतफहमियां हैं। सही जानकारी के अभाव में आप गलत उम्मीदें पाल सकते हैं। आवेदन करने से पहले सच्चाई जानना जरूरी है। आपको तथ्यों और कल्पना के बीच का अंतर समझना होगा। यह योजना एक जादू की छड़ी नहीं है। यह एक अवसर है, लेकिन इसकी अपनी सीमाएं और नियम हैं। आइए इन भ्रमों को दूर करें।

“यह पक्की नौकरी है” – सच या झूठ

यह सबसे बड़ा भ्रम है। बहुत से छात्र इसे ‘सरकारी नौकरी’ समझ रहे हैं। सच्चाई यह है कि यह नौकरी नहीं है। यह केवल एक इंटर्नशिप है।

  • अवधि: यह सिर्फ 12 महीने का अनुबंध है। 365 दिन बाद यह अपने आप खत्म हो जाएगा।
  • भविष्य: इंटर्नशिप के बाद कंपनी आपको नौकरी पर रखने के लिए बाध्य नहीं है। वे आपको रख सकते हैं या जाने दे सकते हैं।
  • प्रकृति: आप वहां ‘कर्मचारी’ नहीं, बल्कि ‘प्रशिक्षु’ (Trainee) के रूप में जाते हैं। आपको वेतन नहीं, वजीफा मिलता है।

आपको इसे एक लर्निंग कोर्स की तरह देखना चाहिए। यह आपको रोजगार के लिए तैयार करता है, लेकिन रोजगार की गारंटी नहीं देता। 12 महीने बाद आपको फिर से जॉब मार्केट में अपनी जगह बनानी होगी। हालांकि, आपके पास अनुभव का हथियार जरूर होगा।

सिर्फ बड़े शहरों के लिए?

ग्रामीण क्षेत्रों के युवाओं को लगता है कि यह योजना केवल दिल्ली, मुंबई या बेंगलुरु के लिए है। यह सोच पूरी तरह गलत है। टॉप 500 कंपनियों का नेटवर्क पूरे भारत में फैला है।

  • बैंकिंग: एसबीआई, एचडीएफसी या आईसीआईसीआई की शाखाएं छोटे कस्बों में भी हैं।
  • डीलरशिप: मारुति, हीरो या टाटा मोटर्स के शोरूम हर जिले में मौजूद हैं।
  • प्लांट: कई बड़ी फैक्ट्रियां और रिफाइनरियां टियर-2 और टियर-3 शहरों में स्थित हैं।
  • सप्लाई चेन: ई-कॉमर्स कंपनियों के वेयरहाउस दूर-दराज के इलाकों में भी हैं।

पोर्टल आपको पिन कोड या जिले के हिसाब से सर्च करने की सुविधा देता है। आपको इंटर्नशिप के लिए अपना घर छोड़कर महानगर जाने की जरूरत नहीं है। अवसर आपके आसपास ही मौजूद हैं।

सभी को सेलेक्शन मिलेगा?

सरकार ने 1 करोड़ युवाओं का लक्ष्य रखा है। इसका मतलब यह नहीं है कि हर आवेदन करने वाले को इंटर्नशिप मिल जाएगी। यह ‘पहले आओ, पहले पाओ’ वाली योजना नहीं है। यहां चयन प्रक्रिया है।

  • प्रतिस्पर्धा: सीटों की संख्या सीमित है। एक सीट के लिए कई दावेदार हो सकते हैं।
  • योग्यता: कंपनी आपकी प्रोफाइल, मार्क्स और स्किल देखेगी। अगर आप उनकी जरूरत के हिसाब से फिट नहीं हैं, तो वे आपको रिजेक्ट कर सकते हैं।
  • एल्गोरिदम: पोर्टल का सिस्टम भी छंटनी करता है। यह बेस्ट मैच ढूंढता है।

आवेदन करना केवल पहला कदम है। चयन होना आपकी योग्यता और किस्मत पर निर्भर करता है। इसलिए आपको अपनी प्रोफाइल बहुत सावधानी से बनानी चाहिए। झूठी उम्मीद न पालें, बल्कि खुद को बेहतर बनाएं।

पीएम इंटर्नशिप योजना का भविष्य (Future Scope)

यह योजना कोई चुनावी वादा या अल्पकालिक उपाय नहीं है। सरकार ने इसे एक दीर्घकालिक निवेश के रूप में तैयार किया है। इसका ढांचा इस तरह बनाया गया है कि यह आने वाले कई वर्षों तक चलता रहे। जैसे-जैसे भारतीय अर्थव्यवस्था 5 ट्रिलियन डॉलर की ओर बढ़ रही है, कुशल कामगारों की मांग बढ़ेगी। यह योजना उस मांग को पूरा करने वाली मुख्य सप्लाई चेन बनेगी। आप उम्मीद कर सकते हैं कि आने वाले समय में यह योजना और बड़ी और बेहतर होगी।

5 साल का रोडमैप

वित्त मंत्री ने बजट 2024-25 में स्पष्ट कर दिया था कि यह योजना पांच साल के लिए है। सरकार ने चरणबद्ध तरीके से आगे बढ़ने का फैसला किया है।

  • वर्ष 1 (2024-25): इसे लॉन्च ईयर माना गया है। फोकस पायलट प्रोजेक्ट और सिस्टम को सेट करने पर है। लक्ष्य 1.25 लाख इंटर्न का है।
  • वर्ष 2-3: यह विस्तार का चरण होगा। सरकार पोर्टल की क्षमता बढ़ाएगी। इंटर्न की संख्या लाखों में पहुंचेगी।
  • वर्ष 4-5: यह परिपक्वता का चरण होगा। तब तक यह योजना एक सुचारू तंत्र बन चुकी होगी। इंटर्नशिप भारतीय शिक्षा प्रणाली का एक सामान्य हिस्सा बन जाएगी।

सरकार हर साल बजट में इसके लिए अलग से फंड जारी करेगी। यह निरंतरता छात्रों और कंपनियों दोनों को भरोसा देती है।

1 करोड़ युवाओं का लक्ष्य

पांच वर्षों में 1 करोड़ युवाओं को इंटर्नशिप देना एक विशाल लक्ष्य है। यह दुनिया के सबसे बड़े कौशल विकास अभियानों में से एक है। इस लक्ष्य को हासिल करने के लिए सरकार को हर साल अपनी गति बढ़ानी होगी।

  • पायलट चरण के बाद हर साल लगभग 20 से 25 लाख युवाओं को जोड़ा जाएगा।
  • केवल टॉप 500 कंपनियां ही काफी नहीं होंगी। सरकार को इन कंपनियों की सप्लाई चेन और वेंडर्स को भी शामिल करना पड़ सकता है।
  • यह संख्या भारत के वर्कफोर्स का एक बड़ा हिस्सा है।

अगर यह लक्ष्य पूरा होता है, तो भारत के पास दुनिया का सबसे बड़ा प्रशिक्षित युवा वर्कफोर्स होगा। यह विदेशी निवेशकों को भारत में फैक्ट्रियां लगाने के लिए आकर्षित करेगा।

आने वाले बदलाव

पायलट प्रोजेक्ट से मिले फीडबैक के आधार पर सरकार योजना में बदलाव कर सकती है। भविष्य में आप इन सुधारों की उम्मीद कर सकते हैं।

  • कंपनियों का दायरा: अभी केवल टॉप 500 कंपनियां शामिल हैं। भविष्य में सरकार टॉप 1000 या 2000 कंपनियों को भी इसमें जोड़ सकती है।
  • वजीफे में वृद्धि: महंगाई को देखते हुए आने वाले वर्षों में 5,000 रुपये की राशि को बढ़ाया जा सकता है।
  • सेक्टर का विस्तार: नए उभरते क्षेत्र जैसे ग्रीन एनर्जी, ड्रोन टेक्नोलॉजी और एआई को इसमें और प्रमुखता दी जा सकती है।
  • क्रेडिट सिस्टम: सरकार इंटर्नशिप को कॉलेज डिग्री के क्रेडिट स्कोर के साथ जोड़ सकती है।

यह योजना स्थिर नहीं है। यह समय और जरूरत के हिसाब से बदलती रहेगी। इसका उद्देश्य हमेशा युवाओं को अधिकतम लाभ पहुंचाना रहेगा।

पीएम इंटर्नशिप योजना पर विशेषज्ञों की राय

किसी भी सरकारी योजना की असली परीक्षा कागजों पर नहीं, जमीन पर होती है। पीएम इंटर्नशिप योजना को लेकर अलग-अलग क्षेत्रों के जानकारों ने अपनी राय रखी है। ज्यादातर प्रतिक्रियाएं सकारात्मक हैं। विशेषज्ञ इसे भारत के स्किल ईको-सिस्टम (Skill Ecosystem) के लिए एक जरूरी कदम मान रहे हैं। हालांकि, कुछ ने इसके क्रियान्वयन को लेकर चुनौतियां भी बताई हैं। आपको यह समझना चाहिए कि इंडस्ट्री और शिक्षा जगत के दिग्गज इस योजना को कैसे देखते हैं।

शिक्षा विशेषज्ञ

शिक्षाविद और प्रोफेसर इस योजना को “मिसिंग लिंक” (Missing Link) बता रहे हैं। वे लंबे समय से शिकायत कर रहे थे कि हमारा सिलेबस पुराना हो चुका है।

  • गैप भरना: विशेषज्ञों का कहना है कि कॉलेज केवल डिग्री दे सकते हैं। वे कॉर्पोरेट कल्चर नहीं सिखा सकते। यह योजना उस कमी को पूरा करती है।
  • व्यावहारिक ज्ञान: प्रोफेसर मानते हैं कि जब छात्र वापस क्लासरूम या जॉब मार्केट में आएंगे, तो उनका नजरिया बदला होगा।
  • आत्मविश्वास: शिक्षाविदों के अनुसार, बड़ी कंपनियों का नाम छात्रों के आत्मविश्वास को कई गुना बढ़ा देगा।

हालांकि, कुछ विशेषज्ञों ने चिंता जताई है। उनका कहना है कि इंटर्नशिप के दौरान निगरानी बहुत जरूरी है। ऐसा न हो कि छात्रों को केवल फाइलें ढोने का काम मिले। उन्हें वास्तव में कुछ सीखने को मिलना चाहिए।

HR और इंडस्ट्री एक्सपर्ट

कॉर्पोरेट जगत ने इस पहल का खुले दिल से स्वागत किया है। एचआर (HR) प्रमुखों के लिए सबसे बड़ी सिरदर्द ‘टैलेंट की कमी’ रही है।

  • भर्ती लागत में कमी: एचआर एक्सपर्ट्स का कहना है कि फ्रेशर्स को ढूंढने और ट्रेन करने में लाखों रुपये खर्च होते हैं। यह योजना उन्हें “तैयार वर्कफोर्स” देगी।
  • परीक्षण का मौका: कंपनियों को उम्मीदवार को परखने के लिए 12 महीने मिल रहे हैं। यह एक लंबा इंटरव्यू जैसा है। वे केवल अच्छे काम करने वालों को ही आगे रोकेंगे।
  • CSR का सही उपयोग: इंडस्ट्री लीडर्स खुश हैं कि उनका सीएसआर फंड अब सीधे उनके ही फायदे (फ्यूचर एम्प्लॉयी) के लिए इस्तेमाल हो रहा है।

इंडस्ट्री एक्सपर्ट्स की सलाह है कि सरकार को पेपरवर्क कम रखना चाहिए। अगर नियम बहुत सख्त हुए, तो कंपनियां पीछे हट सकती हैं।

युवाओं की प्रतिक्रियाएं

सोशल मीडिया और कॉलेज कैंपस में इस योजना को लेकर काफी चर्चा है। युवाओं की प्रतिक्रिया मिली-जुली है, लेकिन उत्साह ज्यादा है।

  • ब्रांड का आकर्षण: आप जैसे युवाओं के लिए टाटा, रिलायंस या महिंद्रा जैसी कंपनियों में घुसना सपना होता है। युवा खुश हैं कि गेट अब खुल गया है।
  • अनुभव की भूख: छात्र समझ रहे हैं कि आज के दौर में एक्सपीरियंस सर्टिफिकेट की कीमत डिग्री से ज्यादा है।
  • वजीफे पर चिंता: कुछ युवाओं का कहना है कि 5,000 रुपये बड़े शहरों में रहने के लिए काफी नहीं हैं। अगर इंटर्नशिप दूसरे शहर में मिली, तो घर से पैसे मंगाने पड़ेंगे।
  • नौकरी की उम्मीद: कई युवा इसे पक्की नौकरी समझ रहे थे। अब वे समझ रहे हैं कि यह केवल ट्रेनिंग है।

कुल मिलाकर, युवा इसे खाली बैठने से बेहतर विकल्प मान रहे हैं। वे इसे करियर की सीढ़ी के पहले डंडे के रूप में देख रहे हैं।

पीएम इंटर्नशिप योजना से जुड़े अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQs)

जब भी कोई नई योजना आती है, तो मन में कई सवाल होते हैं। यहां हम आपके उन सभी आम सवालों के जवाब दे रहे हैं जो आप अक्सर पूछते हैं। इससे आपके सारे संदेह दूर हो जाएंगे। आपको आवेदन करने से पहले इन बातों को जानना चाहिए।

क्या आवेदन करने की कोई फीस है?

नहीं। पीएम इंटर्नशिप योजना में आवेदन करना पूरी तरह मुफ्त है। सरकार आपसे पंजीकरण या आवेदन के लिए कोई शुल्क नहीं लेती है। पोर्टल पर प्रोफाइल बनाने के लिए आपको एक रुपया भी खर्च नहीं करना है। यदि कोई एजेंट या वेबसाइट आपसे पैसे मांगती है, तो सतर्क हो जाएं। वह फर्जी हो सकता है।

क्या रहने और खाने की व्यवस्था कंपनी करेगी?

आमतौर पर नहीं। कंपनियां आपको केवल वजीफा (Stipend) देती हैं। रहने और खाने का इंतजाम आपको खुद करना होगा।

  • आपको मिलने वाले 5,000 रुपये इसी खर्च के लिए हैं।
  • सरकार 6,000 रुपये की एकमुश्त राशि भी इसीलिए देती है।
  • कुछ बड़ी कंपनियां अपनी कैंटीन में सस्ता या मुफ्त खाना दे सकती हैं। यह पूरी तरह कंपनी की पॉलिसी पर निर्भर करता है।

क्या बीच में इंटर्नशिप छोड़ सकते हैं?

हां, आप इंटर्नशिप छोड़ सकते हैं। कोई आपको जबरदस्ती नहीं रोक सकता। लेकिन ऐसा करने के नुकसान हैं।

  • आपको अनुभव प्रमाण पत्र (Experience Certificate) नहीं मिलेगा।
  • आपको शेष महीनों का वजीफा नहीं मिलेगा।
  • भविष्य में आप इस योजना में दोबारा आवेदन नहीं कर पाएंगे।

केवल आपातकालीन स्थिति या पक्की नौकरी मिलने पर ही छोड़ने का फैसला लें।

क्या इसके बाद सरकारी नौकरी मिलेगी?

बिल्कुल नहीं। यह एक बहुत बड़ा भ्रम है। पीएम इंटर्नशिप योजना का सरकारी नौकरी से कोई संबंध नहीं है।

  • यह निजी क्षेत्र (Private Sector) का अनुभव है।
  • सरकार आपको प्रशिक्षण दे रही है, नौकरी की गारंटी नहीं।
  • इसका फायदा आपको प्राइवेट कंपनियों में नौकरी पाने में मिलेगा।

क्या मुझे लैपटॉप या मोबाइल मिलेगा?

यह आपके काम की प्रकृति (Job Role) पर निर्भर करता है।

  • अगर आपका काम ऑफिस का है, तो कंपनी आपको वहां डेस्कटॉप या लैपटॉप देगी।
  • अगर फील्ड वर्क है, तो कुछ कंपनियां टैबलेट दे सकती हैं।
  • ध्यान रखें कि ये उपकरण कंपनी की संपत्ति होते हैं। इंटर्नशिप खत्म होने पर आपको इन्हें वापस करना होगा।

क्या छुट्टियां मिलेंगी?

हां, आप कंपनी के कर्मचारी नियमों के दायरे में आएंगे।

  • आपको साप्ताहिक छुट्टी (Weekly Off) मिलेगी।
  • कंपनी की लिस्ट के अनुसार त्योहारों की छुट्टियां मिलेंगी।
  • बीमारी या जरूरी काम के लिए आकस्मिक अवकाश (Casual Leave) का प्रावधान भी हो सकता है।

अगर मेरा चयन नहीं हुआ तो क्या होगा?

घबराने की जरूरत नहीं है। यह योजना 5 साल तक चलेगी।

  • आप अगले चक्र (Cycle) में फिर से आवेदन कर सकते हैं।
  • आप अपनी प्रोफाइल अपडेट करें और नए कौशल जोड़ें।
  • आप दूसरी कंपनियों या दूसरे सेक्टर में प्रयास कर सकते हैं।

निष्कर्ष: क्या पीएम इंटर्नशिप योजना युवाओं के लिए गेम-चेंजर है?

पीएम इंटर्नशिप योजना का विश्लेषण करने के बाद, यह कहना गलत नहीं होगा कि यह योजना भारतीय युवाओं के लिए निश्चित रूप से एक ‘गेम-चेंजर’ है। यह केवल एक सरकारी वजीफा वितरण योजना नहीं है; यह भारत के स्किल ईको-सिस्टम (Skill Ecosystem) में एक क्रांतिकारी बदलाव है। दशकों से हम सुन रहे थे कि “भारत के युवाओं के पास डिग्री है, लेकिन रोजगार क्षमता (Employability) नहीं है।” यह योजना सीधे उसी समस्या पर प्रहार करती है।

अवसर और चुनौती का संतुलन

यह योजना युवाओं को वह देती है जो कोई कॉलेज नहीं दे सकता— वास्तविक दुनिया का अनुभव। जब एक साधारण कॉलेज का छात्र टाटा, रिलायंस या एलएंडटी जैसी कंपनियों के गेट से अंदर जाता है, तो उसकी सोच का दायरा बदल जाता है।

  • सकारात्मक पक्ष: यह आपको ‘फ्रेशर’ के टैग से मुक्त करती है। यह आपको आर्थिक आजादी का पहला स्वाद चखाती है। सबसे बड़ी बात, यह आपको नेटवर्क बनाने का मौका देती है।
  • चुनौती: यह कोई जादुई छड़ी नहीं है जो रातों-रात आपको अमीर बना दे। वजीफा सीमित है और काम की उम्मीदें ज्यादा होंगी। जो युवा इसे ‘छुट्टी’ या ‘टाइम पास’ समझेंगे, वे अपना समय बर्बाद करेंगे। लेकिन जो इसे ‘तपस्या’ मानकर सीखेंगे, उनका करियर बहुत तेजी से आगे बढ़ेगा।

भविष्य की दिशा

1 करोड़ युवाओं को प्रशिक्षित करने का लक्ष्य अगर आधा भी पूरा हुआ, तो भी भारत के पास दुनिया का सबसे बड़ा कुशल वर्कफोर्स होगा। यह न केवल युवाओं के लिए, बल्कि भारत की अर्थव्यवस्था के लिए भी संजीवनी है। कंपनियां खुश हैं क्योंकि उन्हें तैयार कर्मचारी मिल रहे हैं, सरकार खुश है क्योंकि बेरोजगारी कम हो रही है, और युवा खुश हैं क्योंकि उन्हें दिशा मिल रही है।

अंतिम सलाह: युवाओं के लिए संदेश साफ है— अवसरों का इंतजार मत कीजिए, उन्हें लपक लीजिए। पीएम इंटर्नशिप योजना वह सीढ़ी है जो आपको बेरोजगारी के दलदल से निकालकर कॉर्पोरेट जगत के गलियारों तक ले जा सकती है। 12 महीने का यह निवेश आपके आने वाले 40 साल के करियर को सुरक्षित कर सकता है। इसलिए, अपनी प्रोफाइल तैयार करें, सही मानसिकता बनाएं और इस सुनहरे अवसर का हिस्सा बनें।

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